Saturday, July 2, 2022
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क्‍या राष्‍ट्रपति चुनाव ने बिहार NDA को एकजुट कर दिया? पढ़ें तकरार से इकरार तक की कहानी


पटना. राष्ट्रपति चुनाव-2022 इस बार बिहार एनडीए के लिए क्या वाक़ई शुभ संकेत लेकर आया है? वर्ष 2020 के बाद द्रौपदी मुर्मू के नाम पर पहली बार NDA की एकजुटता बिहार में दिखाई दी है. तमाम घटक दलों (मांझी की हम, नीतीश की जदयू, पशुपति कुमार पारस की लोजपा) ने एक सुर में एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में अपना समर्थन व्‍यक्‍त किया है. यही नहीं लोजपा (रामविलास) के चिराग पासवान भी NDA में आते दिख रहे हैं. इसके पीछे राजनाथ सिंह की चिराग पासवान से वह बातचीत है, जिसमें उन्होंने चिराग पासवान से राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए समर्थन मांगने के साथ ही चिराग पासवान को एनडीए में ही बने रहने का संदेश दिया. राजनीतिक जानकारों की नजर में वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति चुनाव के जरिये NDA को पुराने दौर में ले जाने की कवायद शुरू कर दी गई है.

दर असल, साल 2020 के बाद से ही बिहार NDA में कई मुद्दों पर आपसी तकरार बढ़ी है. इसकी वजह से ख़बर यह भी आने लगी की क्या नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू NDA से बाहर चली जाएगी. मामला चाहे जनसंख्या नियंत्रण का हो या फिर जातिगत गणना, विशेष राज्य का दर्जा, राष्ट्रपति चुनाव, बिहार में लॉ एंड ऑर्डर या फिर RRB रेलवे भर्ती का मसला हो बिहार में एनडीए के घटक दलों के तेवर अलग ही दिख रहे थे. हाल फ़िलहाल में अग्निपथ योजना के मुद्दे पर NDA नेताओ के सुर अलग-अलग उठने लगे थे. इस बीच इफ़्तार के आयोजन ने भी भाजपा और JDU के बीच की राजनीति को तब गर्मा दिया था, जब नीतीश कुमार तेजस्वी यादव के बुलावे पर राबड़ी आवास पहुंचे थे. तेजस्वी यादव भी नीतीश कुमार के बुलावे पर JDU के इफ़्तार में शामिल हुए थे. बात तब और गर्मा गई जब जातिगत जनगणना के मुद्दे पर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव बंद कमरे में 1 घंटे से ज़्यादा वक्‍त तक विचार-व‍िमर्श करत रहे.

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सजग हुई बीजेपी
जातिगत जनगणना के मुद्दे पर राजनीति और गर्माती उससे पहले ही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व हरकत के आ गया और बीजेपी भी जातिगत जनगणना कराने को तैयार हो गई. इसके बाद आया राष्ट्रपति चुना. का मामला. जेडीयू के बड़े नेता अचनक से नीतीश कुमार की उम्मीदवारी की बात उठाने लगे. इसने NDA में हलचल तेज कर दी. इसके बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जो कदम उठाया उससे बिहार NDA में एकजुटता बढ़ने की तस्वीर दिखाई देने लगी.

…और इस तरह एकजुट हुआ बिहार एनडीए
दरअसल, भाजपा की तरफ़ से राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा को तमाम राजनीतिक दलों से बातचीत के लिए अधिकृत किया गया था. राजनाथ सिंह ने बिहार में नीतीश कुमार से लेकर NDA के तमाम घटक दलों से एक-एक करके बातचीत शुरू की. राष्ट्रपति चुनाव में NDA के नेता और उनके सुर एक साथ दिखने लगे. बिहार NDA में माहौल तब और ख़ुशनुमा हो गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को फ़ोन कर NDA की राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम की जानकारी दी और JDU ने द्रौपदी मुर्मू के नाम पर हरी झंडी दिखा दी.

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जीतन राम मांझी और पशुपति पारस में समर्थन में आए
द्रौपदी मुर्मू के नाम पर जीतन राम मांझी की पार्टी हम और लोजपा (पशुपति पारस गुट) ने भी समर्थन का ऐलान करने में देर नहीं की. राजनाथ सिंह ने चिराग़ पासवान को भी फ़ोन कर समर्थन मांगा और चिराग़ को भी NDA का ही हिस्सा बताया तो उन्‍होंने भी बिना देर किए समर्थन की घोषणा कर दी. इसके साथ ही बिहार NDA फिर से पुराने स्वरूप में दिखाई देने लगा.

क्‍या कहते हैं राजनीतिक विश्‍लेषक?
जानेमाने पत्रकार कन्हैया भेलारी कहते हैं कि अगर नीतीश कुमार की महत्वकांक्षा प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं होगी (जो फ़िलहाल तो है) तो फिर NDA के लिए राह आसान हो जाएगी. रही बात चिराग़ की तो उनके लिए NDA स्वाभाविक सहयोगी है, जहां उनकी राजनीति आगे बढ़ सकती है, क्योंकि तेजस्वी और चिराग़ दोनों की नज़र मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है. वह आगे बताते हैं कि पशुपति पारस के सामने अब कोई विकल्प नहीं बचा है और जीतन राम मांझी फ़िलहाल NDA से संतुष्ट हैं. जहां तक बात चिराग़ और नीतीश कुमार के आपसी संबंधों की है तो राजनीति में न तो कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही दुश्मन. भाजपा के वरिष्ठ नेता पहल करेंगे तो बात बन जाएगी.

Tags: Bihar NDA, Bihar News



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