Saturday, July 2, 2022
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दिल्‍ली में पराली नहीं ये थी सर्दियों में प्रदूषण की वजह, CEEW ने स्‍टडी में किया दावा


नई दिल्‍ली. राजधानी दिल्‍ली में हर साल सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है. पिछले कई सालों से अक्‍टूबर महीने के बाद एकाएक पर्यावरण में बदलाव और प्रदूषण की परत के वायुमंडल में जम जाने की परेशानी से दिल्‍ली वाले जूझ रहे हैं. वहीं इस प्रदूषण के लिए अलग-अलग विशेषज्ञों द्वारा पड़ौसी राज्‍यों में जलाई जाने वाली पराली से लेकर, वाहनों से होने वाले प्रदूषण, निर्माण और उद्योगों की गतिविधियों को जिम्‍मेदार ठहराया जाता है. हालांकि अब काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) की ओर से आज जारी एक स्वतंत्र अध्ययन इंप्रूविंग एयर क्वालिटी मैनेजमेंट थ्रू फॉरकास्ट्स: अ केस स्टडी ऑफ दिल्लीज एयर पॉल्यूशन ऑफ विंटर 2021 में इसे लेकर जानकारी दी गई है.

सीईईडब्‍ल्‍यू के अध्‍ययन में सामने आया है कि पिछली सर्दी में दिल्ली के वायु प्रदूषण भार का 64 फीसदी हिस्सा इसकी सीमाओं के बाहर से आया था. प्रदूषण के बाहरी स्रोतों में, आसपास के राज्यों में सर्दी से बचने और खाना पकाने जैसी जरूरतों के लिए कृषि अवशेषों और अन्य बायोमास जैसे कोयला, लकड़ी आदि को जलाना शामिल था. वहीं दिल्‍ली में सर्दी से बचने के लिए बायोमास जलाने के अलावा ट्रांस्‍पोर्ट और कंस्‍ट्रक्‍शन गतिविधियों के चलते पैदा हुई धूल को पीएम 2.5 को बढ़ाने वाला प्रमुख कारक पाया गया.

पराली जलाने वाले समय में नहीं था सबसे ज्‍यादा प्रदूषण
सीईईडब्ल्यू की प्रोग्राम लीड तनुश्री गांगुली ने कहा, ‘हमारे अध्ययन ने पाया है कि पिछले साल पराली जलाने का जो दौर था, वह दिल्ली में सर्दी का सबसे ज्‍यादा प्रदूषण वाला समय नहीं था. इसके बजाय 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच, 30-दिनों का समय सबसे ज्‍यादा प्रदूषण वाला फेज था. पॉल्‍यूशन के लिए जिम्मेदार प्राथमिक कारणों में परिवहन, बायोमास जलाना और धूल जैसे स्रोत शामिल थे. इस स्‍टडी के परिणामों ने इन प्रमुख क्षेत्रों से उत्सर्जन को रोकने के लिए दीर्घकालिक और आपातकालीन दोनों ही तरह की गतिविधियों को मजबूत करने की जरूरत को बल दिया है. इसके अलावा, कई पूर्वानुमान प्रणालियों के साथ अलग-अलग वैज्ञानिक समूहों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने और विभिन्न समूहों के अलग-अलग अनुमानों में मौजूद अंतरों में एकरूपता लाने की भी कोशिश की जानी चाहिए.’

75 फीसदी दिनों में बहुत खराब और गंभीर रही दिल्‍ली की हवा
अध्ययन यह भी बताता है कि दिल्ली में सर्दी के दौरान लगभग 75 फीसदी दिनों में हवा की गुणवत्ता गिरकर बहुत खराब और गंभीर स्तरों तक पहुंच गई. हालांकि, 2021 में पराली जलाने की अवधि (15 अक्टूबर से 15 नवंबर) के दौरान पड़ोसी राज्यों में आग जलाने की घटनाएं बढ़ने के बावजूद, दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर पिछले साल के स्तर से कम था. ऐसा मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण हुआ.

जीआरपी लागू करने के लिए ये हो व्‍यवस्‍था
सीईईडब्‍ल्‍यू की ओर से कहा गया कि पूर्वानुमान प्रणालियों ने पिछली सर्दी के मौसम में दिल्ली में बहुत ज्‍यादा गंभीर वायु प्रदूषण वाले दिनों को रोकने में मदद की. रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि इन पूर्वानुमानों के आधार पर बिजली संयंत्रों के संचालन, निर्माण गतिविधियों और ट्रकों की आवाजाही पर रोक लगाने जैसे अल्पकालिक आपातकालीन उपायों को अपनाया गया था. हालांकि, अब आने वाले समय में गंभीर वायु प्रदूषण वाले दिनों में और ज्‍यादा कमी लाने के लिए इन पूर्वानुमान प्रणालियों को चाहिए कि वे पीएम 2.5 के बारे में और ज्यादा सटीक अनुमान उपलब्ध कराएं. इसके अलावा, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) को लागू करने की व्यवस्था निश्चित तौर पर पूर्वानुमानों से मिले मॉडल्ड प्रदूषण स्रोतों पर आधारित होनी चाहिए, और उसी के अनुसार समय तय होना चाहिए. यह कदम विभिन्न गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए अस्थायी आपात निर्देशों की जरूरत को खत्‍म कर देगा.

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म का हो इस्‍तेमाल
सीईईडब्ल्यू के रिसर्च एनालिस्ट आदिल खान ने कहा, प्रदूषण के बारे में पहले से अनुमान लगाने वाली मौजूदा प्रणालियों ने वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान कर लेने की अपनी क्षमता को दिखाया है, इसलिए इन्हें उत्सर्जन नियंत्रण के साथ-साथ प्रदूषण बढ़ाने वाली अन्‍य गतिविधियों की रोकथाम के लिए और इमरजेंसी उपायों को लागू करने के लिए सक्रियता से इस्तेमाल करना चाहिए. इसके अलावा, अधिकारियों को वायु प्रदूषकों, प्रदूषण के स्रोतों और संबंधित अनुमानों के बारे में स्थानीय लोगों को जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने के बारे में सोचना चाहिए. यह जानकारी शहरवासियों को वायु प्रदूषण से बचाव करने और गतिविधियों को घटाने में मदद कर सकती है. दिल्ली और पड़ोसी राज्यों की सरकारों को खाना पकाने और सर्दी से बचाव के लिए बायोमास जलाने की घटनाओं का विस्तार जानने के लिए एक सर्वे कराना चाहिए और स्वच्छ ईंधन पर आधारित वैकल्पिक उपायों को उपलब्ध कराना चाहिए.

Tags: Air pollution, Delhi air pollution, Delhi pollution



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