Saturday, June 25, 2022
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दिहाड़ी मजदूर ने बनाया दुर्लभ पौधों का सीड बैंक, मुफ्त बांटकर चलाई संरक्षण की मुहिम


भावनगर. जो लोग यह मानते हैं कि साधनहीनता या गरीबी किसी रचनात्मक काम को करने की राह का रोड़ा है, उनके लिए गुजरात के भावनगर के तलाजा के रहने वाले मुकेश धापा एक अनुकरणीय उदाहरण साबित हो सकते हैं. पेशे से दिहाड़ी मजदूर मुकेश धापा पिछले चार साल से लगातार जंगलों से दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधों, फूलों और सब्जियों के बीज जुटा कर पूरे देश में लोगों को मुफ्त भेजने का काम कर रहे हैं.

दिहाड़ी मजदूरी करते हुए अपने 5 लोगों के परिवार का खर्च चला रहे मुकेश धापा ने अपने बचपन के शौक को नहीं छोड़ा. जैसे ही उनको मौका मिला और एक राह मिली, उन्होंने उसका फायदा उठाने का निश्चय किया. बचपन से मुकेश धापा को जंगलों में जाना और बीजों को बटोरने का शौक था. लेकिन वे समझ नहीं पाते थे कि इनको जुटाकर वे आखिर करेंगे क्या?

सोशल मीडिया से मिली एक नई राह
उनके कुछ दोस्तों ने जब उन्हें सोशल मीडिया के बारे में जानकारी दी तो मुकेश धापा को एक राह मिल गई. सोशल मीडिया पर मुकेश धापा लोगों से जुड़ने लगे और जरूरतमंद लोगों को बीज भेजने का काम करने लगे. इसके लिए उन्होंने अपना एक बीज बैंक बना लिया है. जिसके बाद खत्म होते जंगलों और दुर्लभ होते जा रहे पेड़-पौधों को बचाने के मकसद से मुकेश धापा ने अपने सीड बैंक को अमली जामा पहनाने का काम किया. जबसे दोस्तों ने मुकेश धापा को सोशल मीडिया पर एक्टिव होना सिखा दिया है, उनका बीजों को बांटने का काम तेजी से बढ़ गया है.

हर किट में भेजते हैं 12 से 13 प्रजाति के 100 से ज्यादा बीज
मुकेश धापा बीजों को इकट्ठा करने के लिए आसपास के जंगलों, बंजर जमीनों, पहाड़ी इलाकों, सड़क के किनारे के पेड़ों और किसानों के खेत-खलिहानों का सहारा लेते हैं. मुकेश धापा किसी भी पेड़ के मालिक से अनुमति मांग कर ही बीज उठाते हैं. वे मालिकों को समझाते हैं आपके पेड़ के बीज यहां नष्ट हो जाएंगे. जबकि वे उसे इकट्ठा करके लोगों को भेजेंगे. जिससे ये बीज पेड़ बन जाएंगे. इससे लोग खुशी-खुशी उनको बीज इकट्ठा करने देते हैं. उन्होंने करीब 300 तरह के पेड़-पौधों, फूलों और सब्जियों का एक अच्छा सीड बैंक बना लिया है. मुकेश धापा ने बीजों की तीन तरह के किट बनाई है. जिसमें पेड़-पौधों, सब्जियों और फूलों के बीजों की अलग-अलग किट हैं. मुकेश धापा हर किट में 12 से 13 प्रकार प्रजाति के बीजों को रखते हैं. वह हर किट में 100 से 125 तक बीज लोगों को भेजते हैं.

लोगों से मांगते हैं बीजों से बने पेड़ों की फोटो
मुकेश धापा हर किसी को भी ऐसे ही बीज बड़ी मात्रा में नहीं देते हैं. वे ऐसे लोगों को बीज देते हैं जो इनकी सेवा करते हैं उनसे पेड़ बना रहे हैं. मुकेश धापा लोगों से इन बीजों से बने पेड़ों की फोटो लोगों से मांगते हैं और बीज लेने वाले लोग खुशी-खुशी पेड़ों की फोटो उनके साथ शेयर भी करते हैं. मुकेश धापा दुर्लभ प्रजाति के बीजों को संरक्षित करते हैं. लोगों से बीजों के बदले वे केवल कूरियर के पैसे लेते हैं. जिसे भी किसी दुर्लभ प्रजाति के बीज चाहिए, उसे अपना पता मुकेश धापा को भेजना होता है. मुकेश पूरे देश में लोगों को इन बीजों को भेज रहे हैं, जिससे इन पौधों की प्रजाति विलुप्त ना हो.

mukesh dhapa

लोगों को देते हैं बीजों के बारे में पूरी जानकारी
पिछले 4 साल से लगातार दुर्लभ प्रजाति के बीज इकट्ठा कर रहे मुकेश धापा का कहना है कि इससे उनके रोजगार पर असर पड़ता है. लेकिन उनके दोस्त उनकी मदद करते हैं और उनका काम चल जाता है. मुकेश धापा का मानना है कि वे कुदरत का काम कर रहे हैं. अगर धरती पर वृक्ष नहीं होंगे तो ऑक्सीजन नहीं होगी. इस काम के लिए मुकेश धापा किसी से कोई मदद नहीं मांगते हैं और जहां तक हो सकता है खुद अपना काम करते हैं. खुद पढ़ाई नहीं कर पाने वाले मुकेश धापा आज खुश हैं कि उनके बच्चे पढ़ रहे हैं और उसी तरह उनके भेजे गए बीजों से वृक्ष बन रहे हैं. वे किसी भी व्यक्ति को बीज भेजने से पहले उसकी पूरी जानकारी भेजते हैं. उसकी किस्म के बारे में बताते हैं, उसको उगाने का तरीका बताते हैं.

mukesh dhapa

जुटाए 150 से ज्यादा दुर्लभ प्रजाति के बीज
मुकेश धापा अब व्हाट्सएप और फेसबुक पर लोगों से जुड़ते हैं और उन्हें अपने बीजों के बारे में जानकारी देते हैं. जो लोग मुकेश धापा के बीजों में रुचि दिखाते हैं, वे उनसे वादा कराते हैं कि जब पेड़ बनाएंगे तो उसकी फोटो जरूर भेजेंगे. इस तरह दुर्लभ प्रजातियों के बीजों के माध्यम से उनका संरक्षण करने की मुहिम चलाकर मुकेश ने दिखा दिया है कि गरीबी में भी एक बेहतर काम किया जा सकता है. आज उनके पास तीन सौ तरह के बीज हैं. जिसमें करीब 150 से 200 किस्मों के बीज दुर्लभ प्रजाति के बीज हैं. मुकेश धापा इन बीजों का संरक्षण कर रहे हैं और इससे उन्हें खुशी मिलती है.

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कुदरत से जो लिया उसे लौटाने की कोशिश
मुकेश धापा ने कहा कि आज तक किसी भी संस्था या सरकार ने उनकी कोई आर्थिक मदद नहीं की है. वे किसी से इसके लिए मदद मांगते भी नहीं है. इस काम के लिए किसी सम्मान या पुरस्कार हासिल करने की उनके मन में कोई इच्छा भी नहीं है. उनका कहना है कि मान-सम्मान से मिलने से मन में गर्व का भाव पैदा होता है. इससे काम से आपका मन भटक जाता है. उन्होंने इसको लेकर भविष्य के बारे में भी कुछ नहीं सोचा है. उनका कहना है वह अपना रोजाना का काम करते रहेंगे और उनकी कोई बहुत बड़ी योजना नहीं है. अपने जीवन में मुकेश धापा ने कुदरत से जो लिया है, उसको लौटाने का एक छोटा सा प्रयास वह कर रहे हैं.

Tags: Forest, News18 Hindi Originals, Tree



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