Saturday, July 2, 2022
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देश में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, अधिकांश जलाशयों में पानी भरा, मध्य भारत में हुई थोड़ी कम बारिश


(सृष्टि चौधरी)
नई दिल्ली.
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ पूरे भारत में वर्षा की कमी पिछले सप्ताह के 32% से घटकर 2% रह गई है. जिससे देश के अधिकांश हिस्सों में जलाशयों में पानी भंडारण में सुधार हुआ है. केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) जिन 143 जलाशयों की निगरानी करता है, उनमें से 103 जलाशयों ने अब तक 80% से अधिक सामान्य भंडारण की सूचना दी है. 19 जलाशयों में अभी भी पानी का भंडार 50% से कम है.

News18.com की एक खबर के अनुसार 23 जून तक उत्तर-पूर्व के लिए मौसम की बारिश 32% से अधिक हो गई है. जहां ऐसा लगता है कि सबसे भीषण बारिश अभी खत्म होनी बाकी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले पांच दिनों तक उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है. ये सभी इलाके विशेष रूप से असम और मेघालय गंभीर बाढ़ से जूझ रहे हैं. जून की बारिश ने कई स्थानों पर अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इंफाल में गुरुवार को 101 मिमी. बारिश दर्ज की गई. जो एक दशक में दूसरी बार 100 मिमी. बारिश के आंकडे को पार कर गई है.

उत्तर में एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ ने उत्तर-पश्चिमी राज्यों में बारिश की औसत 77% की कमी को खत्म कर दिया है. यहां औसत से 7% ज्यादा बारिश हो चुकी है. मौसम विभाग के अनुसार मानसून पहले ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर चुका है और इस सप्ताह इसके और आगे बढ़ने की उम्मीद है. जबकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के बावजूद मध्य भारत में वर्षा की कमी 33 फीसदी और दक्षिणी प्रायद्वीप में 15% पर बनी हुई है. कुल 36 उप-मंडलों में से गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल को कवर करने वाले 16 उप-मंडलों में अभी भी कम बारिश दर्ज की गई है. आईएमडी के अनुसार जून के अंत तक बारिश की इस कमी की भरपाई हो जाएगी, क्योंकि अगले पांच दिनों के दौरान बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, विदर्भ और गंगीय पश्चिम बंगाल में व्यापक वर्षा के साथ मानसून जोर पकड़ लेगा. 6 जुलाई तक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के पहुंच जाने की संभावना है.

इस बीच केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की निगरानी में रहने वाले 143 जलाशयों के भंडारण में भी सुधार हुआ है. वर्तमान में यह 49.654 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जो कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 28% है. जबकि समग्र भंडारण की स्थिति पिछले वर्ष की इसी अवधि (55.645 बीसीएम) से कम है. फिलहाल यह पिछले 10 वर्षों की इसी अवधि (39.832 बीसीएम) के औसत भंडारण से बेहतर है. 143 जलाशयों में से 103 जलाशयों ने 80% से अधिक भंडारण की सूचना है और 40 जलाशयों ने 80% से 50% भंडारण की सूचना दी है.

सीडब्ल्यूसी के नवीनतम अपडेट के अनुसार, गंगा, सुवर्णरेखा, तापी, कच्छ, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी में सामान्य से बेहतर जल भंडारण उपलब्ध है. नर्मदा, महानदी और दक्षिण की पड़ोसी नदियों में सामान्य के करीब है. जबकि साबरमती, सिंधु और माही में इसकी भारी कमी है, जो पश्चिम में मानसून की धीमी गति को दिखाता है.

राज्यों के लिए मानसून की बारिश महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे खरीफ फसलों की बुवाई के लिए जरूरी हैं. आमतौर पर खरीफ की बुवाई 15 जून से 15 जुलाई के बीच की जाती है. आईएमडी के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, पूरे बिहार और उत्तर पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों को सप्ताह के अंत में कवर करने की संभावना है. जबकि 6 जुलाई तक पूरे देश में मानसून आ जाएगा.

Tags: Monsoon, Monsoon Session, Monsoon Update, Pre Monsoon Rain



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