Thursday, June 30, 2022
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पर्यावरण संरक्षण की मिसाल: खेजड़ी के 1 पेड़ को बचाने के लिये यह ट्रस्ट खर्च रहा है 15 लाख रुपये


बाड़मेर. राजस्थान में एक कहावत है कि ‘सिर साटे रूख रहे तो सस्तो जान’ यानी सिर के बदले अगर एक पेड़ बचता है तो यह सौदा महंगा नहीं बल्कि सस्ता है. राजस्थान के कई इलाकों में विभिन्न विकास योजनाओं और सोलर एनर्जी के नाम पर बड़ी संख्या में राज्य वृक्ष खेजड़ी (Khejri Tree) के साथ अन्य पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है. इनमें कई जगह तो राजस्थान के कल्प वृक्ष माने जाने वाली खेजड़ी को जड़ों सहित नेस्तनाबूद किया है. लेकिन इन सबके बीच पर्यावरण संरक्षण का एक ऐसा अनूठा उदाहरण (Unique initiative of environmental protection) सामने आया है जो आपको हैरान कर देगा. बाड़मेर के श्री मातारानी भटियाणीजी चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से खेजड़ी के एक पेड़ को बचाने के लिये 15 लाख रुपये अतिरिक्त खर्चा आयेगा.

दरअसल पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर शहर के जूना केराड़ मार्ग पर इन दिनों श्री मातारानी भटियाणीजी चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से भव्य श्री माजीसा धाम का निर्माण करवाया जा रहा है. इसमें 60 बाई 80 फीट के भूखंड के बीच में राज्य वृक्ष खेजड़ी का एक पेड़ आ रहा है. संस्थान उसे वहां से हटाने की बजाय येन-केन बचाने का सराहनीय प्रयास कर रहा है. ट्रस्ट की ओर से खेजड़ी को बचाने के लिए मंदिर के नक्शे में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है. इसके साथ ही ट्रस्ट पर इसके लिए करीब 15 लाख का अतिरिक्त वित्तीय भार भी पड़ा है.

खेजड़ी की गहराई में फाउंडेशन भरके उसे मजबूत किया जा रहा है
खेजड़ी के पेड़ को बचाने के साथ ही उसकी गहराई में फाउंडेशन भरके उसे मजबूत भी किया जा रहा है. एक दर्जन से अधिक मजदूर पिछले तीन दिन से यहां जुटे नजर आ रहे हैं. मंगलवार को इस दृश्य को जिसने भी देखा तो वह हृदय से अभिभूत नजर आया. इसके साथ ही लोगों ने ट्रस्ट के प्रयासों की जमकर प्रशंसा की. ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वरूपचंद और पदाधिकारी सुरेश कुमार तेजमालता बताते हैं कि कुदरत को सहेजने के लिए हर एक पेड़ की जरूरत है और वही ट्रस्ट ने किया है.

पेड़ को बचाने के लिए जी जान से जुटे है दर्जनों लोग
बाड़मेर में दर्जनों लोग खेजड़ी के एक पेड़ को बचाने के लिए जी जान से जुटे नजर आए. इसके गवाह बन रहे लोगों को कहना कि जब एक संस्थान इस तरह के प्रयास करके पेड़ को बचा रहा है तो सरकारें और निजी कंपनियां पेड़-पौधों को क्यों नहीं बचा सकती है ? वे क्यों लगातार अंधाधुंध उन्हें काटने में लगे हुये हैं. उन्हें बाड़मेर के मातारानी भटियाणी मंदिर निर्माण ट्रस्ट से सीख लेनी चाहिये.

Tags: Amazing story, Barmer news, Rajasthan news, Save environment



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