प्‍यार के नाम पर सनक वाले काम, क्‍या ऐसे प्रेमियों का कोई इलाज हो सकता है? – crazy work in the name of love can there be any cure for such lovers – News18 हिंदी

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नई दिल्‍ली. एक युवक ने अपनी प्रेमिका को मजबूर किया कि वह अपने प्रायवेट पार्ट पर ब्‍लेड से प्रेमी का नाम लिखे, तब वह उससे शादी करेगा. लखनऊ की इस घटना में प्रेमिका अस्‍पताल में भर्ती होकर इलाज करा रही है तो युवा प्रेमी आवेंद्र सोनवानी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस को मिली शिकायत और घटना की शुरुआती पड़ताल में जो जानकारी निकलकर आई है, उसके मुताबिक आवेंद्र, पीड़ित लड़की की प्रेम परीक्षा ले रहा था, उसकी शर्त थी कि प्रेम परीक्षा में पास होने के बाद ही वो उससे शादी करेगा.

इससे पहले लखनऊ में पिछले हफ्ते ही सूफियान नाम के लड़के ने पड़ोस में ही रहने वाली अपनी प्रेमिका को चौथी मंजिल से इसलिए धक्का दे दिया था, क्योंकि वह धर्म बदलकर उससे शादी के लिए तैयार नहीं थी. घायल लड़की की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई. आज़मगढ़ में भी एक ऐसी ही सनकभरी वारदात हुई. विदेश में नौकरी करने वाले प्रिंस यादव ने अपनी प्रेमिका साधना प्रजापति की इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उसकी शादी किसी दूसरे लड़के से हो गई थी. प्रिंस यादव ने साधना की हत्या के बाद उसके शव के पांच टुकड़े कर कुएं में फेंक दिए थे.

श्रद्धा मर्डर केस में आरोपी ने अपनी प्रेमिका के 35 टुकड़े किए 

वहीं, दिल्ली में आफताब अमीन पूनावाला ने अपनी  लिव इन पार्टनर श्रद्धा की हत्या के बाद उसके 35 टुकड़े किए और अलग-अलग इलाकों में उन्हें ठिकाने लगाया. इस तरह की सभी घटनाओं में मुख्य रूप से कथित तौर पर दो ही किरदार शामिल हैं. एक प्रेमी, दूसरी प्रेमिका लेकिन क्‍या वे प्‍यार के रिश्‍ते में रहते हैं? जिस भी रिश्ते में प्यार वाकई होता है, उस रिश्ते में इस तरह की खौफनाक वारदात नहीं होती है, ऐसी सनक नहीं होती है. इन सभी कहानियों के किरदार में एक सनकी है, दूसरा पीड़ित और इनके रिश्ते में सनक भरी हुई है.

ऐसे सवालों का जवाब क्‍या है 
सवाल है कि शहर-दर-शहर बेटियों के खिलाफ इस तरह की सनकभरी वारदात क्यों हो रही है? समाज में पल रहे ऐसे सनकियों को पहचाना कैसे जाए? ऐसी सनकभरी घटनाओं से इन बेटियों की सुरक्षा कैसे हो सकती है? और सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ऐसी वीभत्स वारदात को अंजाम देने वाले इन सनकियों का इलाज क्या है? एक-एक कर इन सारे सवालों के जवाब तलाशते हैं.

बेटियों के खिलाफ सनक वाली वारदात क्यों?
सनक से भरी इन वारदातों का बारीकी से विश्लेषण किया जाए तो एक साथ कई कारण आसानी से समझ में आते हैं, जिनमें संवेदनाओं की कमी, क्षणिक आवेश, ना को बर्दाश्त ना कर पाना, पार्टनर पर आधिपत्य का भाव और आभासी दुनिया का भाव प्रमुख माने जा सकते हैं. मनोवैज्ञानिक निशा खन्ना बताती हैं कि किसी भी रिश्ते में एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और उन्हें तरजीह देना रिश्ते को और संजीदा बनाता है, लेकिन अक्सर इस तरह के रिश्ते में आगे चलकर दोनों तरफ से भावनाओं की अनदेखी शुरू हो जाती है.

इमोशनल ब्लैकमेलिंग को हथियार बनाते हैं लड़के 

इन चारों मामलों में भावनाओं की अनदेखी तो हुई ही है, साथ ही अपने पार्टनर्स पर कंट्रोल का भाव भी था. ये कंट्रोल इमोशनल और फिजिकल दोनों तरह का था. लखनऊ में प्रेमिका के प्राइवेट पार्ट पर ब्लेड चलवाने वाले आवेंद्र सोनवानी का मामला ऐसे ही इमोशनल कंट्रोल का एक उदाहरण है. मनोवैज्ञानिक निशा बताती हैं “कई मामलों में लड़के इमोशनल ब्लैकमेलिंग को हथियार बनाते हैं. अपनी जायज-नाजायज मांगों को मनवाने के लिए तरह-तरह के इमोशनल हथकंडे अपनाते हैं.” एक्सपर्ट आज़मगढ़ की साधना प्रजापति और प्रिंस यादव के केस को ना को बर्दाश्त ना कर पाने का वीभत्स उदाहरण बताते है.

ऐसे सनकियों को पहचाना कैसे जाए?
महिला अधिकार कार्यकर्ता मीनल पाठक बताती हैं कि पार्टनर के ऐसे व्यवहार की पहचान करना बहुत मुश्किल नहीं है, अगर आपने आंखों पर पट्टी नहीं बांधी रखी है. मामूली उतार-चढ़ाव पर ये खुद-ब-खुद सामने आने लगते हैं. पार्टनर को अपनी दुनिया से बिल्कुल अलग-थलग कर देना. उसकी आज़ादी को खत्म कर देना. एक जगह पर सीमित कर देना, ये कुछ पहचान हैं जो आसानी से महसूस किये जा सकते हैं. इसके अलावा किसी भी मुद्दे पर लड़की की असहमति देख आपा खो देना, छोटी सी बात भड़क उठना. लड़की के आत्मविश्वास या बराबरी वाले काम पर भड़कना. लड़की को अपनी बात मानने के लिए मजबूर करना या उसको किसी परेशानी में घिरा देख खुशी महसूस करना, ये कुछ सामान्य से बदलाव हैं जो इनकी पहचान बताते हैं.

ऐसे सनकियों से बचें कैसे?
ये जिम्मेदारी सबसे पहले खुद पीड़ित पक्ष की बनती है. आप कहेंगे ऐसा क्यों? तो समझिए, सबसे पहले अपने पार्टनर के बारे में जानकारी आप ही को होती है या होगी उसके बाद ही किसी और तक उसका सच पहुंचेगा. यहां मैं एक बार फिर श्रद्धा वाकर-आफताब केस का जिक्र करना चाहूंगा. श्रद्धा और आफताब में पहले भी कई बार झगड़े होते थे, श्रद्धा ने खुद भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई हुई थी. यहां तक कि उसने ये भी आशंका जताई थी कि आफताब उसके टुकड़े-टुकड़े कर देगा. बावजूद इसके श्रद्धा, आफताब के साथ बनी रही. श्रद्धा नौकरी करती थी, अपने परिवार से रिश्ते खत्म करने के बाद भी आत्मनिर्भर थी, उसे जब पहली बार इस बात का अहसास हुआ कि आफताब का व्यवहार उसके प्रति ठीक नहीं है, उसे तभी उससे अलग हो जाना चाहिए था. ऐसा ही लखनऊ की निधि और आवेंद्र सोनवानी की प्रेमिका को करना चाहिए था. आप एक नाजायज मांग पूरी करेंगी, दूसरी होगी, वो पूरी करेंगी तो तीसरी होगी और ये सिलसिला चलता जाएगा. आप अपने पार्टनर की बदतमीजियां बर्दाश्त करती रहेंगी, वो उसकी आदत बनती जाएगी. इसलिए जरूरी है कि ऐसा पहला संकेत मिले तभी उसका विरोध कीजिए, सनकी मानसिकता वाले लोगों से रिश्ते खत्म कीजिए और फिर परिवार को बताइए. परिवार के लिए ये जरूरी है कि वो अपने बच्चे या बच्चियों को ऐसे मौके पर साथ दें, उन्हें अकेला महसूस ना होने दें.

इन सनकियों का इलाज क्या?

इस पूरी चर्चा का सबसे अहम पहलु है कि आखिर ऐसे सनकियों का इलाज क्या है? मनोवैज्ञानिक निशा खन्ना बताती हैं कि किसी भी व्यक्ति में इस तरह का व्यवहार रातों रात विकसित नहीं होता है बल्कि ये उसकी परवरिश, उसका परिवेश, उसकी संगति, उसके खुद के अनुभवों से बनता है. यानी कह सकते हैं कि इस तरह की सनक या स्वभाव विकसित होने में वर्षों लगते हैं. इसलिए इसके इलाज के लिए भी होम्योपैथी पद्धति की तरह ही सतत प्रक्रिया की जरूरत है. मैं ये नहीं कह रहा कि ऐसे लोगों को कानूनी प्रक्रिया में नहीं लाया जाना चाहिए. इनके कृत्यों के लिए इन्हें कानूनी प्रावधानों की तरह सज़ा भी मिलनी चाहिए लेकिन साथ ही ऐसे लोगों के लिए काउंसिलिंग, मानसिक इलाज जैसे उपाय करने चाहिए. ताकि इन्हें अपनी गलतियों का अहसास हो सके, ये जिंदगी की कीमत समझ सकें और रिश्तों की अहमियत समझ सकें.

Tags: Illicit relationship, Love affair, Relationship



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