Saturday, July 2, 2022
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यूपी: पुलिस महकमे का हाल बुरा, प्रमोशन के बाद भी 151 अफसरों को नहीं मिली तैनाती


ममता त्रिपाठी
लखनऊ . भारतीय जनता पार्टी (भाजपा (BJP)) 2017 में कानून व्यवस्था के नाम पर ही उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई थी. उसकी दोबारा वापसी भी अच्छी कानून व्यवस्था के नाम पर ही हुई है. मगर पुलिस (UP police) महकमे का हाल अंदर से कैसा है ये आपको बताते हैं. यूपी पुलिस में करीब 151 ऐसे अफसर हैं जिनका प्रमोशन तो हो चुका है मगर तैनाती नहीं हुई है, कई अफसर तो ऐसे हैं जो प्रमोशन पाने के बाद भी जूनियर पद पर 6 साल से पड़े हुए हैं. इसमें एडीजी से लेकर सीओ रैंक तक के अफसर शामिल हैं.

6 साल से एक ही जगह टिके हैं एडीजी जोगदंड
आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले कार्यकाल में यह नियम बनाया था कि तीन साल से ज्यादा कोई भी अफसर एक जगह पर तैनात नहीं रहेगा. एडीजी बीपी जोगदंड का आखिरी तबादला 22 जनवरी 2016 को एडीजी कार्मिक से एडीजी मुख्यालय के पद पर हुआ था, यह तबादला भी इसलिए हुआ था क्योंकि वो आईजी से एडीजी रैंक में प्रमोट हुए थे. उसके बाद यूपी में दो विधानसभा चुनाव हो गए मगर वो अभी भी एडीजी मुख्यालय के पद पर ही हैं.

2017 के बाद से कहीं नहीं हुआ तबादला
2017 में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई और योगी आदित्यनाथ पहली बार मुख्यमंत्री बने. उसके बाद बड़े पैमाने पर अधिकारियों के ट्रांसफर हुए, लेकिन कई अधिकारी ऐसे हैं जिनका ट्रांसफर हुआ ही नहीं. प्रशिक्षण निदेशालय में तैनात एडीजी संजय एम तरडे, पीएसी पश्चिमी जोन में तैनात अमित चंद्रा, एसपी भर्ती बोर्ड सुरेश्वर, एसपी पीटीसी शफीक अहमद, एसपी विजिलेंस रामजी यादव, रामकिशुन, सीबीसीआईडी में तैनात राजकमल, एसपी रेलवे लखनऊ सौमित्र यादव, डीआईजी एंटी करप्शन राजीव मल्होत्रा इन सारे अधिकारियों का तबादला 2017 के बाद से कहीं नहीं हुआ. क्या महकमे के पास इन अधिकारियों का कोई विकल्प नहीं है.

पुलिस महकमे में 162 पुलिस अफसर ट्रांसफर की राह देख रहे हैं. इस साल 1 जनवरी को लगभग डेढ़ सौ अधिकारियों के प्रमोशन हो चुके हैं मगर नई सरकार के गठन के चलते किसी का भी तबादला नहीं हो पाया है. इसमें पुलिस अधीक्षक, डीआईजी, आईजी और एडीजी रैंक के अफसर शामिल हैं.

75 इंस्पेक्टर बने डीएसपी, मगर पोस्टिंग नहीं
पिछले पांच महीने से 75 इंस्पेक्टर प्रमोट होकर अफसर रैंक में पुलिस उपाधीक्षक बन गए हैं मगर पोस्टिंग रुकी पड़ी है. 2016 बैच के दो और 2017 बैच के कुल 14 अफसर ऐसे हैं जिनका प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और पुलिस अधीक्षक के पद पर उनकी तैनाती होनी है मगर अभी तक किसी तरह की कोई सुगबुगाहट देखने को नहीं मिल रही है. आगरा, सुल्तानपुर, सीतापुर, वाराणसी, सोनभद्र और मिर्जापुर जिले में डीआईजी रैंक के अफसर पुलिस अधीक्षक के पद पर बैठे हैं.

चार आईजी भी बाट जोह रहे नई तैनाती की
डीआईजी से आईजी बने चार अधिकारी भी अपनी नई तैनाती की बाट जोह रहे हैं. लव कुमार नोएडा में अपर पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात हैं जो डीआईजी रैंक के अफसर का पद है. कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात आनंद प्रकाश तिवारी का भी प्रमोशन हो चुका है, मगर अभी तक नई तैनाती नहीं मिली. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटे डाक्टर के एजिलारसन भी प्रतीक्षारत हैं.

नए डीजीपी आने से बढ़ी उम्मीद
कुल मिलाकर कहा जाए कि सैकड़ों पुलिस अधिकारी अपने रैंक के हिसाब से पद पाने के लिए सालों, महीनों से इंतजार कर रहे हैं मगर वो इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. चूंकि कानून व्यवस्था प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है तो इस बाबत भी नीति नियंताओं को गंभीरता से सोचना चाहिए और इस लंबी चौड़ी फोर्स का सदुपयोग करना चाहिए. उत्तर प्रदेश को नया डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान के रूप में मिला है जिसके बाद ये उम्मीद की जा रही है कि अफसरों की तैनाती का ये बैकलॉग जल्दी ही खत्म होगा.

Tags: BJP, Police officers, UP police



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