Tuesday, June 28, 2022
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रस्सी से जकड़ा मिला 25 किलो का दुर्लभ कछुआ, महंगे चिप्स के लिए होती है तस्करी


नई दिल्ली. वाइल्ड लाइफ एसओएस (Wild Life SOS) की टीम को आगरा में रेलवे स्टेशन (Agra Railway Station) के पास एक 25 किलो का दुर्लभ कछुआ मिला है. कछुआ (Turtle) एक बोरी में बंद रस्सी से जकड़ा हुआ था. बताया जा रहा है कि यह दक्षिण एशिया में मीठे पानी में रहने वाली कछुए की एक दुर्लभ प्रजाति है. दिखने में भी यह दूसरे कछुओं से एकदम अलग होता है. वाइल्ड लाइफ एक्ट  (Wild Life Act) के तहत बाघ के बराबर ही इसे भी रखा गया है. विदेशों में इसकी खासी डिमांड है. इसका मांस और चिप्स लाखों रुपये किलो के हिसाब से बिकते हैं. इसकी तस्करी (Smuggling) करते हुए पकड़े जाने पर 3 से 7 साल तक की सजा है. ऐसा माना जा रहा है कि शिकारी इसे ले जा नहीं पाए तो रास्ते में ही फेंक गए.

कछुए के पेट से बनाए जाते हैं चिप्स

पर्यावरणविद और गंगा अभियान से जुड़े रहे राजीव चौहान इस तस्करी का खुलासा करते हुए बताते हैं, चंबल नदी से लगे आगरा के पिनहाट और इटावा के ज्ञानपुरी और बंसरी में निलसोनिया गैंगटिस और चित्रा इंडिका तीन ऐसी प्रजाति हैं जिनका इस्तेमाल चिप्स बनाने में किया जाता है. कछुए के पेट की स्किन को प्लैस्ट्रान कहा जाता है. इसी प्लैस्ट्रान के चिप्स बनाए जाते हैं.

प्लैस्ट्रान को काटकर अलग कर लिया जाता है. फिर इसे उबालकर सुखाया जाता है. इसके बाद इसे बंगाल के रास्ते विदेशों में भेज दिया जाता है. गर्मी में प्लैस्ट्रान के चिप्स बनाए जाते हैं तो सर्दियों में जिंदा कछुओं की तस्करी की जाती है. क्योंकि सर्दियों में तस्करी करने में कोई परेशानी नहीं आती है.

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थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर 2 लाख रुपये किलो बिकते हैं चिप्स

राजीव चौहान के अनुसार स्थानीय तस्करों से मिली जानकरी के मुताबिक कछुओं को पकड़ने और उनके चिप्स बनाने वाले 5 हज़ार रुपये किलो के हिसाब से ज्ञानपुरी और बंसरी में पकड़े गए निलसोनिया गैंगटिस और चित्रा इंडिका कछुओं के चिप्स बेचते हैं. इटावा-पिनहाट से यह चिप्स 24 परगना पहुंचाए जाते हैं. जहां से यह थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर को तस्करी कर दिए जाते हैं. तस्करों के अनुसार इन तीन देशों में पहुंचते ही चिप्स 2 लाख रुपये किलो तक बिकने लगता है. एक किलो वजन के कछुए में से 250 ग्राम तक चिप्स निकाल आते हैं.

चिप्स खाने और सूप पीने के पीछे यह हैं धारणा
राजीव चौहान ने बताया कि जब तस्करों से कछुओं के इस तरह इस्तेमाल करने की मंशा जानी तो उन्होंने बताया कि थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर समेत कई दूसरे देशों में इसे सैक्स पावर बढ़ाने के लिए खाया और पिया जाता है. इसके चिप्स को चिप्स पापड़ की तरह से भी इस्तेमाल किया जाता है और उबालकर सूप भी बनाया जाता है. वहीं इसका मांस पश्चिम बंगाल में ही 400 रुपये किलो तक बिकता है.

Tags: Agra news, Endangered turtles, Uttar pradesh news



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