राहुल गांधी को देख सीएम सरमा ने कहा- ‘सद्दाम हुसैन,’ जानिए राजनीति में ‘दाढ़ी’ कैसे बदल देती है नेता की पहचान

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हाइलाइट्स

भारत जोड़ो यात्रा में बदल गया राहुल गांधी का लुक
उठा सवाल- क्या चुनाव से है उनकी दाढ़ी का संबंध
क्या दाढ़ी रखने से बदल जाएगी राहुल की शख्सियत

नई दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बीच लोगों की नजरें उनकी दाढ़ी पर भी जा रही हैं. नेताओं का कहना है कि अक्सर ‘चंचल और पार्ट-टाइम राजनेता’ कहे जाने वाले राहुल गांधी दाढ़ी में गंभीर और दृढ़ व्यक्तित्व दिखाई देते हैं. भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत के वक्त राहुल क्लीन-शेव थे. जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ती गई और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा, वैसे-वैसे उनका क्लीन-शेव चेहरा भी धीरे-धीरे गायब होने लगा. इधर, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा है कि दाढ़ी में राहुल गांधी सद्दाम हुसैन लग रहे हैं. उनके इस बयान की कांग्रेस ने निंदा भी की.

अब उनके चेहरे पर अच्छी-खासी और आकर्षक दाढ़ी है. ऐसा नहीं है कि राहुल पहले दाढ़ी में नहीं रहे हैं, लेकिन, इस बार वह और उनकी दाढ़ी लंबे समय तक दिखाई दिए हैं. उनके इस रूप के बीच कई कांग्रेस नेताओं के अंदर सवाल उठ रहा है कि आखिर राहुल गांधी ने दाढ़ी क्यों रखी है. क्या इससे राजनीतिक मदद मिलेगी. इस सवाल पर कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतिज्ञ दिलीप चेरियन का कहना है कि दाढ़ी राजनीति में मदद तो करती है, लेकिन तब जब आपने निचले स्तर से काम करना शुरू किया हो. केवल दाढ़ी रखने से आप चुनाव नहीं जीत सकते.

राहुल की दाढ़ी का चुनाव से लेना-देना नहीं- कांग्रेस
दूसरी ओर, राहुल गांधी को करीब से जानने वालों का कहना है कि उनकी यात्रा और उनके रूप का चुनाव से कोई लेना-देना नहीं. उनका कहना है कि राहुल इस रूप में खुद को सहज महसूस कर रहे हैं, इसलिए दाढ़ी रख रखी है. हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि दाढ़ी राहुल गांधी के दो काम कर सकती है. पहला, वह उन्हें गंभीर, दृढ़ और आक्रामक व्यक्तित्व का दिखा सकती है. इससे वह बीजेपी पर ज्यादा आक्रामक लग सकते हैं. राहुल गांधी कह चुके हैं कि चूंकि, बीजेपी ने संपर्क से सारे रास्ते बंद कर दिए हैं, इसलिए लोगों तक पहुंचने के लिए यह यात्रा निकाली जा रही है. दूसरा, जो लोग यह कह रहे थे कि राहुल गांधी की यात्रा अधूरी और पिकनिक वाली होगी, उन्हें उसका जवाब मिल गया. राहुल रोज सुबह 6 बजे यात्रा शुरू कर देते हैं. इसके अलावा उन्हें जिस लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है, वैसा इस यात्रा में कुछ नहीं है. ऐसे में दाढ़ी और अव्यवस्थित रूप यह दिखाता है कि उनके पास सलीके से कपड़े पहनने और अच्छा दिखने का समय नहीं है.

पूर्व पीएम इंदिरा-पीएम मोदी की खास पहचान
कहा जाता है कि ड्रेसिंग-लुक के पीछे कोई न कोई रणनीति होती ही है. इस मामले में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी अलग ही दिखाई देते हैं. दोनों अच्छी वेशभूषा और विद्वत्ता के लिए जाने जाते हैं. दोनों ने राज्यों के दौरों के दौरान स्थानीय स्टाइल और परंपरा को ध्यान में रखा. गौरतलब है कि बंगाल चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी दाढ़ी बढ़ाई थी. तब, कुछ लोगों ने उनकी तुलना गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर से की थी. लोगों का कहना था कि बंगाल की जनता को लुभाने के लिए पीएम मोदी ने यह दाढ़ी रखी थी. उस वक्त राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए ट्वीट किया था- ‘चोर की दाढ़ी…’

बीजेपी ने कसा था ये तंज
इसी तरह अब राहुल गांधी की दाढ़ी भी राजनीतिक रूप ले रही है. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा है कि दाढ़ी में राहुल गांधी सद्दाम हुसैन लग रहे हैं. उनके इस बयान की कांग्रेस ने निंदा भी की. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्लीन-शेव से दाढ़ी तक का सफर पार्टी को पिछले चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई कर पाता है कि नहीं.

Tags: National News, Rahul gandhi



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