Thursday, June 30, 2022
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रेल की कहानीः कभी बॉम्बे से पेशावर तक का सफर कराती थी यह ट्रेन, पूरा किया 110 साल का सफर


नई दिल्ली. भारतीय रेलवे की सबसे पुरानी ट्रेनों में से एक पंजाब मेल 110 बरस की हो गई है. अब इस ट्रेन ने 111 वें वर्ष का सफर शुरू किया. बॉम्बे से पेशावर तक लाने-ले जाने वाली पंजाब मेल कब शुरू हुई यह तारीख तो रेलवे के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है, लेकिन वर्ष 1911 के अखबार और 12 अक्टूबर 1912 को एक नाराज यात्री की शिकायत के आधार पर, ‘दिल्ली में ट्रेन के देर से आगमन’ के बारे में, कमोबेश यह अनुमान लगाया गया है कि पंजाब मेल ने 1 जून 1912 को बैलार्ड पियर मोल स्टेशन से यात्रा शुरू की थी. आपको जानकर हैरानी होगी कि इन दिनों जब ट्रेनों की लेटलतीफी की खबरें आम हैं, पंजाब मेल के साथ एक दिलचस्प तथ्य यह है कि इस ट्रेन को कभी उसके समय पर चलने की वजह से ही पसंद किया जाता था.

पंजाब मेल प्रसिद्ध फ्रंटियर मेल से 16 वर्ष से अधिक पुरानी है. वास्तव में बैलार्ड पियर मोल स्टेशन जीआईपीआर सेवाओं का केंद्र था. पंजाब मेल या पंजाब लिमिटेड, उस समय इस नाम से जानी जाती थी. भारत में उनकी पहली पोस्टिंग पर पीएंडओ स्टीमर मेल में ब्रिटिश राज के अधिकारी, उनकी पत्नियों के साथ थे. साउथेम्प्टन और बॉम्बे के बीच स्टीमर यात्रा 13 दिनों तक चली. चूंकि ब्रिटिश अधिकारियों के पास बंबई की अपनी यात्रा के साथ-साथ अपनी पोस्टिंग के स्थान तक ट्रेन से अपनी अंतर्देशीय यात्रा दोनों के लिए संयुक्त टिकट थे, इसलिए वे उतरने के बाद, मद्रास, कलकत्ता या दिल्ली के लिए जाने वाली ट्रेनों में से एक में सवार हो गए.

47 घंटे में पहुंचती थी मुंबई से पेशावर
पंजाब लिमिटेड बंबई के बैलार्ड पियर मोल स्टेशन से जीआईपी मार्ग के माध्यम से पेशावर तक, लगभग 2,496 किमी की दूरी तय करने के लिए 47 घंटे लेती थी. विभाजन के पूर्व की अवधि में पंजाब लिमिटेड ब्रिटिश भारत की सबसे तेज रफ्तार वाली गाड़ी थी. पंजाब लिमिटेड के मार्ग का बड़ा हिस्सा जीआईपी रेल पथ पर से इटारसी, आगरा, दिल्ली, अमृतसर तथा लाहौर से गुजरता था तथा पेशावर छावनी में समाप्त हो जाता था. इस गाड़ी ने 1914 से बंबई वीटी (अब छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई) से आवागमन प्रारंभ किया. बाद में इसे पंजाब लिमिटेड के स्थान पर पंजाब मेल कहा जाने लगा और इसकी सेवाएं दैनिक कर दी गईं. 1914 में बांबे से दिल्ली का जीआईपी रूट 1,541 किमी था, जिसे यह गाड़ी 29 घंटा 30 मिनट में पूरा करती थी. 1920 के प्रारंभ में इसके समय को घटाकर 27 घंटा 10 मिनट किया गया. 1972 में गाड़ी फिर से 29 घंटे लेने लगी. सन् 2011 में पंजाब मेल 55 अन्य स्टेशनों पर रुकने लगी.

छह डिब्बे लगते थे, यात्रियों के लिए सिर्फ 3
ट्रेन के शुरुआती सफर के दौरान इसमें छह डिब्बे जोड़े जाते थे, तीन यात्रियों के लिए और तीन डाक सामान व मेल के लिए. तीन यात्री डिब्बों में केवल 96 यात्रियों को ले जाने की क्षमता थी. 1930 के मध्य में पंजाब मेल में तृतीय श्रेणी का डिब्बा लगाया गया. 1945 में पंजाब मेल में वातानुकूलित शयनयान लगाया गया. 1968 में इस गाड़ी को डीजल इंजन से झांसी तक चलाया जाने लगा तथा बाद में डीजल इंजन नई दिल्ली लेकर आने लगा. 1976 में यह फिरोजपुर तक जाने लगी. 1970 के अंत या 1980 के प्रारंभ में पंजाब मेल भुसावल तक इलेक्ट्रिक इंजन से चलाई जाने लगी, जिसमें इगतपुरी में डीसी से एसी ट्रेक्शन बदलता था.

punjab mail

आज पंजाब मेल मुंबई से फिरोजपुर छावनी तक की 1930 किमी तक की दूरी 32 घंटे 35 मिनट में पूरी करती है. मार्ग में 52 स्टेशनों पर रुकती है. अब इसमें रेस्टोररेंट कार के स्थाान पर पेंट्रीकार लगाई जाती है. कोविड 19 के कारण दिनांक 22 मार्च 2022 से सभी ट्रेन सेवाएं निलंबित की गई थीं. अनलॉक के बाद 1.5.2020 से ट्रेन सेवाएं धीरे-धीरे स्पेशल के रूप में शुरू की गईं. पंजाब मेल स्पेशल दिनांक 1.12.2021 से एलएचबी कोचों के साथ शुरू हुईं. इस ट्रेन की नियमित सेवा 15.11.2021 से शुरू हुई. वर्तमान में इसमें एक फर्स्ट एसी सह वातानुकूलित टू टीयर, 2 -एसी टू टियर, 6- एसी थ्री टीयर, , 6 शयनयान, एक पैंट्रीकार, 5 सेकेंड क्लास के कोच तथा एक जनरेटर वैन है.

टाइम ऐसा सेट था कि हर जंक्शन पर गाड़ियां होती थी कनेक्ट
सेंट्रल रेलवे और बाद में वेस्ट सेंट्रल रेलवे में लंबी सेवाएं देने के बाद रिटायर हुए स्टेशन मैनेजर दिनेश कुमार रिछारिया बताते हैं कि पंजाब मेल की दो खास बातें थीं. एक यह गाड़ी 99 प्रतिशत तक समय पर चलती थी. कभी कोई तकनीकी खराबी आ जाए तो अपवाद है अन्यथा राइट टाइम चलने के कारण ही इसे लोग पसंद करते थे. दूसरी खासियत यह है कि इस ट्रेन की टाइमिंग के अनुसार ही बॉम्बे से फिरोजपुर के बीच के जितने भी जंक्शन हैं वहां से कनेक्टिंग गाड़ियां छोड़ी जाती थीं और पहुंचती थीं. इस तरह यह न केवल एक रूट बल्कि अन्य रूट के यात्रियों के लिए भी सुविधाजनक थी. वर्षों तक यह ट्रेन 5 डाउन और 6 अप नंबर के साथ चली. शुरुआती दौर में डाक पहुंचाने के कारण इसे ‘डाक गाड़ी’ भी कहा जाता था.

Tags: Indian railway, News18 Hindi Originals



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