शत्रुनाश: अपाचे हेलिकॉप्टर, सुखोई 30, के-9 वज्र और आर्मी के कौशल से किया दुश्मन पर कब्जा – jaisalmer indian air force and army capture enemy with the skills of apache helicopter sukhoi 30 k 9 vajra in shatrunash exercise – News18 हिंदी

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हाइलाइट्स

दुश्मन को तीन तरफ से घेरकर भारतीय वायुसेना और थल सेना ने दिखाई ताकत
एयर डिफ़ेंस सिस्टम, रडार, एम्यूनेशन और फ़्यूल डिपो को निशाना बनाकर दुश्मन की ताकत खत्म की

बीकानेर. भारतीय सेना (Indian Army) के साउथ वेस्टर्न कमान ने पाकिस्तान सीमा के करीब महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (Mahajan Firing Range)  में सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड फायर पावर एक्सरसाइज ‘शत्रुनाश’ आयोजित की है. इस अभ्यास में भारतीय सेना के स्वदेशी और नई तकनीक के साथ पुराने प्लेटफॉर्म के फायरिंग का मिश्रण दिखाई दिया. शत्रुनाश अभियान (Shatrunash Exercise) डिफेंसिव से ज्यादा ऑफेंसिव ऑपरेशन था. भारतीय वायुसेना के अटैक में अपाचे और कैनन फायर करते दिखे तो थलसेना के एवियेशन स्वदेशी वेपेनाइजड हैलिकॉप्टर रूद्र ने भी एक के बाद एक कई राकेट निशाने पर दागे.

भारतीय सेना के दुश्मन के इलाके में घुसने से पहले भारतीय वायुसेना के दो सुखोई-30 ने दुश्मन को टार्गेट किया. उसके तुरंत बाद एक के बाद एक कई लेज़र गाइडेड मिसाइल दाग दी. सभी बम और मिसाइल ठीक निशाने पर लगे. इसी बीच दो आर्म एवियेशन के अटैक हैलिकॉप्टर ऑपरेशन एरिया में पहुंचे और उन्होंने भी ताबड़तोड़ रॉकेट टार्गेट पर दाग दिए. अब आर्मी एवियेशन के हैलिकॉप्टर वॉर जोन में अपना काम खत्म करके लौटे तो भारतीय वायुसेना के दो अपाचे  ताकत को दुश्मन पर बरसाने के लिए पहुंच गए.

एरियल अटैक से दुश्मन की ताकत को आधा किया
अभ्यास में जब एरियल अटैक ने दुश्मन की ताक़त को आधा किया तो ‘शत्रुनाश’ करने का ज़िम्मा भारतीय तोपखाने ने संभाल लिया. पहले BM-21 ग्रैड मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर फ़ायरिंग ने मोर्चा संभाला. लोकेशन और कॉरेडिनेट मिलने के बाद लगातार 4 लॉन्चर एक्टिव हुए और ताबड़तोड़ रॉकेट फ़ायर करना शुरू कर दिया. BM-21 ग्रैड की ख़ासियत है कि महज 20 सैंकेड में 40 रॉकेट दाग सकता है और इसकी रेंज 50 किलोमीटर के करीब है. एक ओर ग्रैड मौत बरसा रहा था तो दो तरफ से 105 Mm फील्ड गन और अपग्रेड 155 Mm शारंग ने भी फायर शुरू दिए.

आपके शहर से (बीकानेर)

दुश्मन को तीन तरफ से घेरकर सरप्राइज अटैक
दुश्मन को दो तरफ से घेरकर फ़ायरिंग करते हुए T-72 टैंक और सैनिकों को लेकर बीएमपी भी आगे बढ़ रही थी. रेंज में फ़ायरिंग से चारों और सिर्फ़ धूल और धूएं का गुबार उठता दिखने लगा. फिर तीसरी तरफ से भारतीय टैंक और तोप का सरप्राइज अटैक शुरू हुआ. T-90 भीष्म और K-9 वज्र ने मोर्चा संभाल लिया. ये वही दो प्लेटफ़ार्म हैं, जिन्होंने चीन को एलएसी पर घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था. हाल ही में अपग्रेड की गई L-70 गन ने भी जलवा दिखाते हुए कई एरियल टार्गेट के ज़मीन पर ला दिया.

पूरा अभ्यास ड्रोन की मदद से कंडक्ट किया
फायरिंग के बीच भारतीय सैनिक दुश्मन के क्षेत्र में पहुंचे और उस पर कब्जा किया. ये महज 50 मिनट में पूरा हो गया. पूरा अभ्यास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद यानी ड्रोन की मदद से कंडक्ट किया गया. साउथ वेस्टर्न कमॉड के कमांडर ले.जनरल ए.एस. भिंडर ने इस पूरी ऑफेंसिव ड्रिल को मॉनिटर किया. ले.जनरल भिंडर ने पूरी कार्रवाई पर संतुष्टि जताई. रूस-यूक्रेन वॉर से सीख के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई भी मिलेट्री है वो उन वॉर और कांफिलिक्ट को देखती है कि किस तरह की तकनीक, टैक्टिस का इस्तेमाल कर रहे हैं. हम सब भी देख रहे हैं और उससे जो लेसन है, उनसे अपने अंदर बदलाव की कोशिश कर रहे हैं.



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