स्वाद का सफ़रनामा: जितना पुराना अचार, स्वाद में उतना दमदार, इम्यूनिटी मजबूत करने वाले अचार का पढ़ें रोचक इतिहास – swad ka safarnama benefits of achar pickle history and interesting facts in hindi – News18 हिंदी

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हाइलाइट्स

भारत जितने अचार की वेरायटी कहीं नहीं.
अचार खाने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और पाचन भी दुरुस्त रहता है.
ईसा पूर्व 2030 मेसोपोटामिया के टाइग्रिस घाटी के लोग खीरे के अचार का उपयोग करते थे.

Benefits of Achar and its History: अचार के बिना भारतीय भोजन अधूरा है. शाकाहारी परिवार हो या मांसाहारी, आचार सबकी पसंद है. नमक, तेल और विभिन्न मसालों का मिश्रण अचार में जान और स्वाद फूंक देता है. किसी सब्जी, डिश या आहार का नाम सुनकर या देखकर मुंह में पानी न आए, लेकिन आचार ऐसी बला है कि नाम याद आते ही मुंह में पानी तैरने लगता है. आचार की विशेषता है कि यह पाचन सिस्टम को दुरुस्त तो रखता ही है, इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाना है.

भारत जितने अचार की वेरायटी कहीं नहीं

पश्चिमी देशों में खीरे का अचार ज्यादा मशहूर है, लेकिन भारत की बात करें तो यहां आम, नींबू, गाजर, गोभी, मिर्च, करोंदा, आंवला, कटहल, मूली, अदरक, लहसुन आदि के अचार खूब खाए जाते हैं. बांस का आचार तक बाजार में बिकता है. इतना ही नहीं, दक्षिण भारत, पंजाब व पहाड़ी इलाकों में चिकन, मछली, झींगे का भी अचार मिलना आम बात है. नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में तो मेंढक के अचार के भी चर्चे हैं. गांव-शहर में तो कुछ गृहणियां अचार डालने में इतनी पारंगत होती हैं कि उनसे अचार डलवाना बेहतर माना जाता है. ऐसी सोच रहती है कि इनके हाथ से डाला गया अचार खराब नहीं होता. अचार नमक, तेल और विभिन्न प्रकार के मसालों का मिश्रण है. अलग-अलग राज्यों में मसालों की मात्रा में घटाव-बढ़ाव हो सकता है, लेकिन स्वाद ऐसा होगा कि मुंह में पानी आना आम बात है. सुबह नाश्ते में मट्ठी, फाफड़ा, नमकपारे आदि के साथ अचार चलेगा तो दोपहर के भोजन में तो यह अनिवार्य तत्व सा है. शाम के नाश्ते में भी लोग इसका मजा लेते हैं तो रात के भोजन में भी इसे खाने की परंपरा है.

भारत में आम, नींबू, गाजर, गोभी, मिर्च, करोंदा, आंवला, कटहल, मूली, अदरक, लहसुन आदि के अचार खूब खाए जाते हैं.

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जितना पुराना अचार, स्वाद में उतना ही दमदार

अब तो बाजारों में हर किस्म का अचार मिलता है. हरियाणा का शहर पानीपत तो अचार के लिए देश-विदेश तक में मशहूर है. यहां का पचरंगा अचार सबसे स्वादिष्ट माना जाता है, लेकिन कहा जाता है कि बाजार में बिकने वाले अचारों को लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखने के लिए उसमें कुछ केमिकल आदि डाले जाते हैं, लेकिन घरों में डाले गए अचार में ऐसा कुछ नहीं होता. भरपूर मसाले और तेल (खासकर सरसों) अचार को लंबे समय तक खराब नहीं होने देते. अचार जितना पुराना होगा, उसका स्वाद और पोषण लगातार बढ़ता जाएगा. अचार सदियों से भारतीय खाद्य संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है, लेकिन प्रामाणिक तौर पर इतिहास या किसी आयुर्वेदिक ग्रंथ में सीधे तौर पर इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है. यह अलग बात है कि जिन फल आदि का अचार डाला है, जैसे कैथ, आम, आंवला, लहसुन, अदरक आदि, इनका वर्णन भारत के प्राचीन ग्रंथों में मिलता है. दूसरी ओर, अचार के स्वाद अम्लीय, लवणीय, तिक्त, कषाय आदि रसों की जानकारी भी इन ग्रंथों में मिलती है.

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अचार जितना पुराना होगा, उसका स्वाद और पोषण लगातार बढ़ता जाएगा.

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वर्षों से चटपटे आहार के रूप में हो रहा है इस्तेमाल

अचार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, न्यूयॉर्क खाद्य संग्रहालयों के पिकल हिस्टरी टाइमलाइन (Pickle History timeline) का कहना है कि ईसा पूर्व 2030 मेसोपोटामिया के टाइग्रिस (Tigris) घाटी के लोग खीरे के अचार का उपयोग करते. ईसा पूर्व 350 में दार्शनिक अरस्तू ने अपनी कृतियों में कहीं-कहीं अचारी खीरे के प्रभावकारी असर की तारीफ भी की है. ऐसा भी कहा जाता है कि रोमन सम्राट जूलियस सीजर (100-44 ईसा पूर्व) भी अचार के शौकीन थे. इतिहास की पुस्तकें यह भी संभावना जताती हैं कि पुराने समय में समुद्री जहाजों से यात्रा करने वाले व्यापारी खाद्य समस्या से बचने के लिए अपने साथ अचार लेकर चलते थे.

भारत के फूड हिस्टोरियन केटी आचाया ने अपनी पुस्तक ‘ए हिस्टोरिकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन फूड’ (A Historical Dictionary of Indian Food) में बताया है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारत में अचारों की एक समृद्ध विरासत है. यहां ज्यादातर अचार सब्जियों या फल को तेल और पानी के साथ रखकर बनाया जाता है. इस मिश्रण में नमक और मसाले डाल कर धूप में रखा दिया जाता है, जहां वे गर्माहट पाकर अच्छी तरह से बन सके. दूसरी ओर चौदहवीं शती में भारत आए मोरक्को विद्वान इब्न बतूता ने भारत में कई प्रकार के अचारों की जानकारी दी है. उसका यह भी कहना है कि अधिकांश भारतीय भोजन में यह पाया जाता है और यदि गायब हो जाता है, तो भोजन लगभग अधूरा लगता है.

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ऐसा भी कहा जाता है कि रोमन सम्राट जूलियस सीजर (100-44 ईसा पूर्व) भी अचार के शौकीन थे.

गुणों और पौष्टिकता से भरपूर है हर वेरायटी का अचार

अचार भोजन में स्वाद बढ़ाता है, भूख को उद्दीप्त भी करता है. इसमें कई गुण हैं, इसलिए हजारों वर्षों से इसका सेवन किया जा रहा है. फूड एक्सपर्ट और अचार उत्पादक कंपनियों का कहना है कि भारतीय अचार में विटामिन ए, सी, के, फोलेट (कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाने वाला रसायन) और कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम जैसे आवश्यक खनिज और विटामिन्स होते हैं, इसलिए यह शरीर के लिए भी गुणकारी है. फूड एक्सपर्ट व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार, इस बात में दो-राय नहीं कि अचार भारतीय भोजन का अनिवार्य तत्व है. यहां तक कि बच्चे व बुजुर्ग भी इसे खूब खाते हैं. इसका स्वाद तो शानदार होता ही है यह पाचन सिस्टम को भी दुरुस्त रखता है. अधिकतर अचार एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, इसलिए वे शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत रखते हैं. इसके चलते शरीर कई सामान्य बीमारियों से बचा रहता है. यह हड्डियों को भी मजबूत बनाने में मददगार है और एनीमिया का इलाज भी कर सकता है.

चटनी की तरह अचार खाएंगे तो दिक्कत नहीं, वरना…

सिम्मी बब्बर के अनुसार, आंवले और नींबू का अचार तो शरीर के लिए बेहद लाभकारी है. यह रक्त को साफ करते हैं और लिवर को भी बीमारियों से बचाए रहते हैं. विभिन्न अचार का सेवन करने से मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या से बचा जा सकता है. अचार में मसाले और तेल डाले जाते हैं, इसलिए यह शुगर लेवल को बढ़ने नहीं देता है. अचार को कम मात्रा यानी चटनी जैसा कम खाएंगे तो शरीर को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है, लेकिन इसे ज्यादा खा लिया जाए तो यह गले का सिस्टम खराब कर सकता है. पेट में मरोड़ भी हो सकती है. चूंकि, अचार में नमक व मसाले अधिक होते हैं, इसलिए हाई बीपी, हार्ट समस्याओं से जूझ रहे लोगों को इसका सेवन करने में सतर्कता बरतनी चाहिए. अचार में तेल की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है. ज्यादा अच्छा यह रहेगा कि बाजार से खरीदा अचार न खाएं, क्योंकि उसमें विभिन्न रसायनों का प्रयोग किया जाता है.

Tags: Food, Lifestyle



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