AYODHYA: हनुमान नगरी के रूप में भी होगी रामनगरी की पहचान, यहां होगा वानर सेना का साम्राज्य

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सर्वेश श्रीवास्तव

अयोध्या. भगवान राम की नगरी अयोध्या को उसकी गरिमा के अनुरूप सजाने और संवारने का काम बीजेपी की डबल इंजन की सरकार कर रही है. उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या को त्रेता युग की तर्ज पर विकसित करने की परिकल्पना को साकार करने का काम तेजी से कर रही है. सरकार ने जहां गोवंश के संरक्षण व संवर्धन के लिए कान्हा उपवन का संचालन किया है. तो वहीं, त्रेता की अयोध्या को जीवंत करने के लिए अब श्रीराम के वानरी सेना को भी संरक्षित करने का काम शुरू होने जा रहा है.

दरअसल योगी सरकार अयोध्या में बंदरों के लिए एक अभ्यारण्य बनाने जा रही है जिसका 80 प्रतिशत स्वरूप तय कर लिया गया है. जल्द ही इसकी डीपीआर (डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाकर शासन को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और आगामी दिनों में बंदरों को प्राकृतिक माहौल के अनुरूप प्रभु राम की वानरी सेना को रखा जाएगा.

बजरंगबली का माना जाता है अवतार
धार्मिक मान्यता है कि, लंका पर विजय हासिल करने के बाद जब प्रभु राम अयोध्या लौटे थे तो उनके साथ बजरंग बली और बड़ी संख्या में वानर सेना भी अयोध्या आई थी. यही कारण है कि देशभर में बंदरों के साथ लोगों की काफी धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं. लोग बजरंगबली के तौर पर इनकी पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन यह बंदर कभी-कभी पर्यटकों और आम लोगों पर हमला बोल देते हैं. बाजार या सार्वजनिक स्थान पर यह उत्पात मचाते हैं. ऐसे में रामनगरी के अंदर इंसान और बंदरों का आमना-सामना ना हो इसके लिए योगी सरकार बंदरों को संरक्षित करने का काम करने जा रही है.

रामनगरी में बनेगा एनिमल जोन
न्यूज़ 18 लोकल से बात करते हुए विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने बताया कि अयोध्या में गोवंश के लिए पहले से कान्हा गौशाला चल रही है. वहीं, अब उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अयोध्या में एनिमल जोन निर्माण किया जाएगा जिसमें शहर में घूमने वाले आवारा कुत्तों के अलावा बंदरों के अभ्यारण्य की भी जगह तय की जाएगी. बंदरों को सुरक्षित प्राकृतिक माहौल में रखा जाएगा. एनिमल प्रोजेक्ट लगभग पिचासी परसेंट बनकर तैयार हो गया है.

कुत्तों को न्यूट्रल करने के लिए हॉस्पिटल निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है. अगले दो-तीन महीने में यह पूरा हो जाएगा. उसको ऑपरेट करने के लिए एनजीओ को हायर करने का कार्य लगभग तैयार है. एक एनजीओ को हायर किया जाएगा जो कुत्तों को न्यूट्रल करेंगे.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा बंदरों के लिए अध्ययन
विशाल सिंह ने यह भी बताया कि बंदरों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है. इसके लिए विभिन्न एनजीओ के विशेषज्ञों की टीम लगी हुई है. बंदरों के लिए कितने फीमेल हैं, कितने मेल हैं उनको कहां शिफ्ट करना है. कैसे शिफ्ट करना है. हर जगह, हर शहर के हिसाब से अलग-अलग माहौल होता है तो यहां पर कौन सी रणनीति किस तरीके से सक्सेसफुल हो सकती है. इसके ऊपर लगातार कार्य चल रहा है.

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