Delhi AIIMS: 36 घंटे बाद भी चालू नहीं हुआ दिल्ली एम्स का सर्वर, जानें कल कैसे होगा OPD मरीजों का इलाज? – aiims opd and other services not started after 36 hours nic data recover patients records nodrss – News18 हिंदी

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नई दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली का सर्वर अभी भी ठप पड़ा है. ई-हॉस्पिटल सर्वर डाउन (E- Hospital Server) होने के कारण ओपीडी (OPD) सहित कई सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं. एम्स रिकॉर्ड में सेंध और सर्वर ठप होने से मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. साइबर एक्सपर्ट्स को इन फाइलों को री-स्टोर करने में अभी भी दिक्कतें आ रही हैं. एनआईसी (NIC) कोशिश कर रही है कि अस्पताल में फिर से डिजिटल सेवाएं बहाल कर दी जाएं. लेकिन, सर्वर अभी तक बहाल नहीं हो पा रहा है. इधर, एम्स ने बयान जारी कर कहा है कि भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT) के साथ-साथ एनआईसी भी एम्स की ऑनलाइन सेवा बहाल करने में लगी हुई है.

आपको बता दें कि एम्स के मुख्य सर्वर बुधवार सुबह 6 बज कर 45 मिनट से ही नहीं खुल रहे हैं. हैकर्स ने एम्स की कई फाइलों को नष्ट कर दिया है. 36 घंटे बाद भी ई-हॉस्पिटल सर्वर को ठीक नहीं किया जा सका है. दो दिन बाद भी स्थिति संभल नहीं पा रही है ऐसे में एम्स की सभी सेवाएं कई घंटों से मैनुअल मोड पर चल रही हैं.

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के साइबर एक्सपर्ट्स बुधवार से ही डाटा रिकवर कनरे की कोशिश कर रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

एम्स में नहीं खुल रही है मरीजों की फाइल

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एम्स के सर्वर ठप हो जाने के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के साइबर एक्सपर्ट्स बुधवार से ही डाटा रिकवर कनरे की कोशिश कर रहे हैं. एम्स सूत्रों की मानें तो संस्थान के मुख्य सर्वर के साथ-साथ बैकअप सर्वर की भी फाइलें बुरी तरह करप्ट हो गई हैं. साइबर एक्सपर्ट्स पवन दुग्गल कहते हैं, एम्स में हैंकिंग का यह अपने तरह का गंभीर मामला है. देश के सबसे बड़े अस्पताल में सेंध लगा कर हैकर्स मेडिकल डाटा को बेच सकते हैं.’

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बुधवार सुबह से ही हर विभाग से फाइल नहीं खुलने वाली शिकायतें आने लगी थीं. सुबह 8 बजे ओपीडी से भी कॉल आती है कि फाइल नहीं खुल रही हैं. एस बीच गनीमत रही कि हैकर्स ने एम्स के डेंटल एजुकेशन और रिसर्च केंद्र में मौजूद दूसरे बैकअप सर्वर में सेंध नहीं लग सकी. अगर एनआईसी की टीम समय पर नहीं पहुंचती तो एम्स के दूसरे बैकअप में भी सेंध लग सकती थी. अगर ऐसा होता तो एम्स के तमाम मरीजों का ब्योरा डिलीट हो सकता था.

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