Lumpy Disease: लॉकडाउन की तर्ज पर 21 दिन नॉनस्टॉप चली रसोई, 11 लाख लड्डू बनाकर गायों की बचाई जान

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लोकेश कुमार ओला

जयपुर. रसोई में नॉनस्टॉप चलती कढ़ाई, हलवाई और खाना बनाते सैकड़ों कार्यकर्ता… कोरोना काल में लॉकडाउन लगा तो कुछ ऐसा ही नजारा दिखा था और असहाय लोगों की मदद की गई. लेकिन अब गायों और गोवंश पर प्राकृतिक संकट आया है तो मदद के लिए एक बार फिर हाथ आगे उठे हैं. इस बार संकट इंसानों पर नहीं, बल्कि बेजुबानों पर है. लंपी वायरस के कारण गायें तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही हैं. कोरोना संकट ने एकजुट होने और मदद करने की सीख दी. इससे प्रेरणा लेते हुए राजस्थान की राजधानी जयपुर के लोगों ने गायों को बचाने के लिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाये हैं.

गायों में लंपी वायरस संकट आने पर लॉकडाउन की तर्ज पर उनके लिए 21 दिन नॉनस्टॉप रसोई चलाई गई और 11 लाख से अधिक आयुर्वेदिक लड्डू बनाकर उनकी जान बचाने में अहम योगदान निभाया गया.

रोजाना 50 हजार लड्डू किये तैयार
जयपुर के मित्राय बी ह्यूमन इंडिया फाउंडेशन के तत्वावधान में लंपी रोग से पीड़ित गायों के लिए 13 सितंबर से मुरलीपुरा के एक मैरिज गार्डन में रसोई शुरू हुई. यहां 21 प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों से निर्मित लड्डू बनाए गए. टीम मित्राय के संस्थापक डॉ. विनीत शर्मा और रश्मि शर्मा ने बताया कि 21 दिन तक दिन रात यह रसोई चली. जहां रोजाना 50 हजार से अधिक लड्डू बनाए गए. इस तरह 11 लाख से अधिक आयुर्वेदिक लड्डू बनाकर आसपास के ग्रामीण इलाकों के गौशालाओं और प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भेजे गये.

जुड़ता गया कारवां और शुरू हो गई गौमाता भोग रसोई
डॉ. विनीत ने बताया कि यह सब कर पाना किसी एक के बस की बात नहीं थी. जब रसोई शुरू की गई तो पहले दो दिन तक लगा कि आगे चला पाना संभव नहीं होगा, लेकिन जैसे ही आमजन को और आसपास के लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से पता लगा तो कारवां जुड़ता गया. पहले दिन छह हलवाई से काम शुरू किया था, लेकिन कारवां ऐसा जुड़ा कि तीसरे ही दिन से 10 से ज्यादा हलवाई और 100 से अधिक वॉलिटियर्स व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने काम में हाथ बंटाना शुरू किया. किसी ने हलवाइयों की मदद की, तो किसी ने लड्डू बांधे.

इस दौरान धर्मगुरुओं से लेकर जनप्रतिनिधियों ने भी यहां पहुंचना शुरू किया. सबने काम होता देखा तो चकित रह गए कि कोई बेजुबानों के लिए भी इतना कर सकता है. कोरोना काल में मित्राय ने इसी तरह पूरे दो माह तक नॉनस्टॉप रसोई चलाई थी. तब जरूरत इंसानों को थी, और इस बार बेजुबानों को है. लेकिन लॉकडाउन का अनुभव काम आया. कारवां जुड़ता गया और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर न्यायिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं, बच्चे सहित जिसने भी देखा वो मदद में जुट गया.

सोचा था फायदा होगा कि नहीं
मित्राय की रश्मि शर्मा ने बताया कि दो दिन जब गायों को आयुर्वेदिक लड्डू खिलाया गया तो सोचा था कि फायदा होगा या नहीं. लगता नहीं था कि इस खतरनाक बीमारी में गायों को इस आयुर्वेदिक लड्डू से कोई फायदा होगा या रिजल्ट आएंगे, लेकिन जैसे ही साकारात्मक परिणाम सामने आए तो डिमांड बढ़ने लगी. गायों की जान बचने लगी तो डिमांड के अनुसार संसाधन बढ़ा कर सभी सहयोगियों ने साथ निभाकर काम किया.

ऐसे करते हैं लड्डू तैयार

औषधीय लड्डुओं में गायों की इम्युनिटी बढ़ाने की सामग्री उपयोग में ली जाती है जिसमें हल्दी, गुड़, दलिया, सोंठ काली मिर्च, लिगोय, दालचीनी, तुलसी कालीजीरी, मुलेठी, अजवाइन, दानामेथी, सनाय पत्ती, जो का आटा, गेहूं का आटा, आंवला, घी, पान के पत्ते, धनिया, जावित्री और जायफल उपयोग में लेते हैं.

इसको बनाने की विधि में सबसे पहले दलिया और आटा को कड़ाही में पकाया जाता है. उसके बाद दलिया से दोगुनी हल्दी, आधी मात्रा में गुड़ और अन्य सामग्री मिलाई जाती है. 10 किलो के लड्डू में डेढ़ किलो घी काम में लिया जाता है. लड्डू बनाने के बाद स्वस्थ और संक्रमित पशु/गाय को दिन में दो लड्डू तीन दिन के लिए दिया जाता है.

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