Sawai Madhopur: चंबल नदी का प्रदूषण बन सकता घड़ियाल व मगरमच्छ के लिए ख़तरा, NGT ने जारी की रिपोर्ट

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गजानंद शर्मा

सवाई माधोपुर. नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी को पर्यटन के लिए विकसित करने के लिए सरकार और वन विभाग लगातार कोशिश कर रहा है. वन विभाग ने राजस्थान के सवाई माधोपुर के पालीघाट पर पर्यटकों के लिए बोटिंग की सुविधा दी है. इससे अब यहां पर्यटक अच्छी संख्या में पहुंचने लगे हैं, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार चंबल नदी में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. चंबल नदी में बढ़ता प्रदूषण सेंचुरी के घड़ियाल, मगरमच्छ व अन्य दुर्लभ जलीय जीवों के लिए खतरा साबित हो सकता है.

हाल ही में केन्द्रीय प्रदूषण मंडल ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें देश भर की नदियों के जल के सैंपल के जांच किये गये थे. नदियों के जल में प्रदूषण के स्तर की जांच के आधार पर आंकड़े जारी किए गए थे. इसमें देश भर की 351 नदियों में प्रदूषण का स्तर अधिक पाया गया था. इनमें चंबल को भी शामिल किया गया है.

सवाई माधोपुर जिले की चंबल नदी में अधिक प्रदूषण नहीं है. लेकिन, कोटा में चंबल में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में यदि जल्द ही प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम नहीं किया गया तो जिले में भी हालात खराब हो सकते है. रिपोर्ट में कोटा में 22 और केशोरायपाटन में छह अत्याधिक प्रदूषित ड्रेन चिन्हित किए गए हैं. इनकी नियमित रूप से राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के द्वारा जांच की जा रही है. कोटा में पांच सीवेज और केशोरायपाटन में दो सीवेज का कार्य प्रगति पर है.

जांच के लिए चंबल नदी के जल के लिए गए नमूने

वन विभाग के अनुसार एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रक मंडल को चंबल नदी के पानी के नमूने लेने के निर्देश जारी किए गए थे. इसके बाद वर्ष 2018 में चंबल के पानी के सैंपल लिए गए थे. उस समय कोटा की चंबल नदी में बीओडी का स्तर 5.5 रहा था. इसके बाद 2019 के नमूनों की बात करे तो यह आंकड़ा 5.75 तक पहुंच गया. जबकि वर्तमान में कोटा में चंबल के पानी में बीओडी का स्तर छह से अधिक पाया गया है.

इसके साथ ही कोटा और मध्य प्रदेश की चंबल नदी में डीओ यानी घुलित ऑक्सीजन की मात्रा में भी इजाफा हो रहा है. वहीं, अगर सवाई माधोपुर जिले में चंबल नदी के पानी की बात करें तो वर्ष 2018 में जिले में चंबल के पानी में बीओडी का स्तर 1.5 से कम था. इसके बाद इसमें इजाफा हुआ और अब यह 2.25 तक पहुंच गया है, लेकिन अभी भी प्रदूषण के हालात जिले की चंबल नदी में नहीं पैदा हुए हैं.

मामले को लेकर नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी उपवन संरक्षक अनिल यादव का कहना है कि पूर्व में जांच के लिए चंबल व बनास नदी के सैंपल लिए गए थे. हालांकि, जिले में चंबल व बनास के पानी में प्रदूषण की मात्रा सामान्य से कम पाई गई है.

Tags: Chambal River, Crocodile, Rajasthan news in hindi, Water Pollution

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