(संवाददाता आशीष जवखेड़कर)
17 साल से मां के नाम दर्ज संपत्ति पर बेटे ने जताया अधिकार, अदालत बोली- भूमि की एकमात्र मालिक मां, बिक्री पर रोक का कोई आधार नहीं।
एनटीवी टाइम न्यूज इंदौर/ इंदौर – पति की मृत्यु के बाद बेटे और बहू से परेशान एक वृद्ध महिला को अदालत से बड़ी राहत मिली है। इंदौर की नवम अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने बेटे और बहू द्वारा मां की संपत्ति बेचने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में वर्षों से मां के नाम दर्ज है और उस पर बेटे का कोई स्वामित्व अधिकार साबित नहीं होता।
मामला खंडवा जिले के बिल्लौराबुजुर्ग गांव स्थित लगभग ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि से जुड़ा है। वृद्धा सुगनबाई डोडिया के पुत्र हरिसिंह डोडिया और बहू भारती डोडिया ने अदालत में दावा किया था कि उक्त संपत्ति वास्तव में उन्होंने खरीदी थी, लेकिन माता-पिता के नाम पर दर्ज करवाई गई थी। इसलिए मां, बहनों और अन्य परिजनों का उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है।
याचिका में बेटे-बहू ने यह भी आरोप लगाया था कि मां, बहनें और अन्य परिजन संपत्ति को बेचने या बंधक रखकर ऋण लेने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बैंक लॉकर और खातों से जेवरात व नकदी निकालने के आरोप भी लगाए थे। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से संपत्ति के विक्रय और अंतरण पर रोक लगाने की मांग की थी।
वृद्धा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता के.पी. माहेश्वरी ने अदालत को बताया कि भूमि और अन्य संपत्तियां पूरी तरह से सुगनबाई डोडिया के नाम पर दर्ज हैं तथा वह वर्षों से उनकी वैध स्वामिनी और कब्जाधारक हैं। बेटे-बहू का संपत्ति पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है और वे वृद्ध मां की संपत्ति पर कब्जा करने की मंशा से मुकदमा कर रहे हैं।
सुनवाई के बाद नवम अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल ने पाया कि विवादित संपत्ति पिछले 17 वर्षों से राजस्व रिकॉर्ड में सुगनबाई डोडिया के नाम दर्ज है। अदालत ने कहा कि वृद्ध महिला अपनी संपत्ति का उपयोग, उपभोग अथवा विक्रय करने के लिए स्वतंत्र हैं। बेटे-बहू यह साबित नहीं कर पाए कि संपत्ति बेचने की कोई वास्तविक प्रक्रिया चल रही है या उससे उन्हें कोई कानूनी नुकसान होने वाला है।
अदालत ने यह भी माना कि संपत्ति बेचने की आशंका केवल अनुमान पर आधारित है और इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य या शिकायत प्रस्तुत नहीं की गई। इन्हीं तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने बेटे हरिसिंह डोडिया और बहू भारती डोडिया की याचिका को निरस्त कर दिया। मामले में माता एवं अन्य प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता के.पी. माहेश्वरी, प्रतीक माहेश्वरी, पवन तिवारी, अमृता सोनकर, पुनीत माहेश्वरी, सुनील यादव, हरिओम परमार, अनुराग कुशवाह, अर्जुन प्रजापति और महक गिरानी ने पैरवी की।
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