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बंगाल में बड़ा प्रशासनिक उलटफेर: सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य

बंगाल में बड़ा प्रशासनिक उलटफेर: सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य, BSF को फेंसिंग के लिए जमीन; 12 दिन में सरकार के 12 बड़े फैसले

शुभेंदु कैबिनेट के ताबड़तोड़ फैसले: CAA लागू करने की हरी झंडी, सरकारी नौकरियों में उम्र सीमा 5 साल बढ़ी, आयुष्मान भारत और उज्ज्वला योजना को मंजूरी, बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने शपथ ग्रहण के मात्र 12 दिनों के भीतर 12 ऐसे बड़े फैसले लिए हैं, जिन्होंने राज्य की राजनीतिक और सामाजिक दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना शामिल है।

1. मदरसों और स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य

सरकार के सबसे चर्चित फैसलों में से एक राज्य के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और बिना सहायता प्राप्त मदरसों सहित सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा (असेंबली) में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य करना है।

पिछली सरकार द्वारा लागू किए गए राज्य गीत ‘बांग्लार माटी बांग्लार जॉल’ की जगह अब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई देगी। नए नियमों के मुताबिक, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे (कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड) गाए जाएंगे और गायन के समय सभी को सावधान की मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य होगा।

2. घुसपैठ पर प्रहार: BSF को 45 दिनों में मिलेगी जमीन

राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए नई कैबिनेट ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कटीले तारों की बाड़ लगाने (फेंसिंग) के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को आवश्यक जमीन हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है। संवेदनशील सीमावर्ती जिलों जैसे मालदा के हबीबपुर ब्लॉक में जमीन का अधिग्रहण कर अगले 45 दिनों के भीतर हर हाल में BSF को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। पिछली सरकार के समय भूमि अधिग्रहण की दिक्कतों के कारण यह काम सालों से अटका हुआ था।

3. CAA और राष्ट्रीय जनगणना का पूर्ण कार्यान्वयन

केंद्रीय कानूनों को राज्य में लागू करने का रास्ता साफ करते हुए कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को आधिकारिक रूप से लागू करने की घोषणा की है। इसके साथ ही, पिछली सरकार द्वारा ठंडे बस्ते में डाले गए केंद्रीय गृह मंत्रालय के जून 2025 के जनगणना परिपत्र (Census Circular) को तत्काल प्रभावी बनाने की मंजूरी दे दी गई है।

4. गोहत्या पर कड़ा कानून और सार्वजनिक वध पर रोक

कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2018 के आदेश और 1950 के अधिनियम का हवाला देते हुए सरकार ने एक नया नोटिस जारी किया है। इसके तहत बिना आधिकारिक पशु चिकित्सक के ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के किसी भी मवेशी (गाय और भैंस) की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं के खुले वध पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

5. युवाओं को बड़ी राहत: नौकरियों की आयु सीमा 5 वर्ष बढ़ी

राज्य के युवाओं और शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। सरकारी नौकरियों के आवेदन के लिए अधिकतम उम्र सीमा में 5 वर्ष की छूट दी गई है, जिससे हजारों ओवरएज हो रहे युवाओं को दोबारा परीक्षाओं में बैठने का मौका मिलेगा।

विशेष इन्फोग्राफिक बॉक्स: 12 दिन में सरकार के 12 ऐतिहासिक फैसले

1

मदरसों में वंदे मातरम

सभी स्कूलों और मदरसों की सुबह की सभा में अनिवार्य गायन।

2

BSF को फेंसिंग की जमीन

घुसपैठ रोकने के लिए 45 दिनों में सीमा पर जमीन का हस्तांतरण।

3

CAA का कार्यान्वयन

नागरिकता संशोधन कानून को राज्य में आधिकारिक मंजूरी।

4

राष्ट्रीय जनगणना

जून 2025 के केंद्रीय जनगणना परिपत्र को लागू करने की स्वीकृति।

5

गोहत्या पर प्रतिबंध

बिना पशु चिकित्सा ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के वध पर पूर्ण रोक।

6

नौकरी की उम्र में छूट

सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन की आयु सीमा में 5 साल की वृद्धि।

7

आयुष्मान भारत योजना

बंगाल के नागरिकों को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा।

8

पीएम उज्ज्वला योजना

गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन का विस्तार।

9

पीएम फसल बीमा योजना

राज्य के किसानों के लिए फसल बर्बादी पर शत-प्रतिशत बीमा सुरक्षा।

10

अवैध मदरसों पर ताला

बिना मान्यता और अवैध रूप से चल रहे मदरसों को बंद करने की कार्रवाई।

11

हिंसा पीड़ितों को न्याय

राजनीतिक हिंसा में मारे गए 321 कार्यकर्ताओं के परिवारों को सहायता।

12

लाउडस्पीकर पर नियंत्रण

धार्मिक स्थलों पर नियमों के उल्लंघन और ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती।

केंद्रीय योजनाओं का बंगाल में प्रवेश

कैबिनेट ने राज्य को केंद्र की महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं से सीधे जोड़ दिया है। बंगाल में अब ‘आयुष्मान भारत’, ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ और ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ को तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है, जिससे सीधे तौर पर राज्य के गरीब परिवारों और किसानों को वित्तीय व स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अपने कार्यकाल की शुरुआत बेहद आक्रामक और “जीरो टॉलरेंस” नीति के साथ की है। जहाँ एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक मामलों पर कड़े फैसले लेकर पार्टी के पारंपरिक एजेंडे को मजबूत किया गया है, वहीं दूसरी तरफ उम्र सीमा में छूट और केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं को लागू कर आम जनता और किसानों के बीच पैठ बनाने की कोशिश की गई है।

विपक्षी दलों (टीएमसी और वामपंथियों) ने इन फैसलों को ध्रुवीकरण की राजनीति बताया है, जबकि नई सरकार का दावा है कि ये फैसले बंगाल के विकास और सुरक्षा के लिए “मां, माटी, मानुष” के असली हित में लिए गए हैं।

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