GST Registration: अब मात्र 3 दिनों में मिलेगा जीएसटी नंबर, केंद्र सरकार बदलने जा रही है पंजीकरण के नियम
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के सदस्य संजय कुमार मंगल ने उद्योग मंडल के एक टैक्स सम्मेलन में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के कर अधिकारी जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए नियमों और आवश्यक दस्तावेजों में एकरूपता लाने पर लगातार काम कर रहे हैं। सरकार की इस नई पहल से बड़े और छोटे दोनों ही प्रकार के कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी और व्यापार करने में आसानी होगी।
देश में व्यापार को और अधिक सरल बनाने (Ease of Doing Business) तथा कर चोरी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार वस्तु एवं सेवा कर (GST) पंजीकरण की नियमावली में बड़ा फेरबदल करने जा रही है। सरकार द्वारा तैयार किए गए नए ब्लूप्रिंट के मुताबिक, आगामी दिनों में ईमानदार और कम जोखिम (Low-Risk) वाले व्यापारियों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के बेहद तेज गति से जीएसटी नंबर आवंटित किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, जाली इनवॉइस (Fake Invoices) के जरिए टैक्स फ्रॉड करने वाले सिंडिकेट पर शिकंजा कसने के लिए सुरक्षा मानकों को भी सख्त किया जा रहा है।
3 कार्य दिवसों में स्वचालित मंजूरी (Auto-Approval)नई नीति के अंतर्गत उन कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई है जो ‘लो-रिस्क’ श्रेणी में आते हैं और हर महीने 2.5 लाख रुपये से अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) आगे बढ़ाते हैं। ऐसे करदाताओं के आवेदनों को कंप्यूटर आधारित प्रणाली द्वारा पूरी तरह से स्वचालित मंजूरी (Auto-Approval) दे दी जाएगी। आवेदन जमा होने के मात्र 3 कार्य दिवसों के भीतर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, जिससे नए स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को अपना काम शुरू करने में होने वाली अनावश्यक देरी से मुक्ति मिलेगी।
‘वन नेशन, वन डॉक्यूमेंट’ नीति पर फोकस
वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों के भीतर जीएसटी पंजीकरण के लिए मांगे जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों में कुछ भिन्नता देखने को मिलती है। व्यापारियों की इसी असुविधा को समाप्त करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ‘दस्तावेजों में एकरूपता’ लाने पर काम कर रही हैं। इसके लागू होने के बाद पूरे देश में जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए एक ही समान मानक और दस्तावेज तय होंगे, जिससे अंतर-राज्यीय व्यापार करने वाली कंपनियों को बड़ी सहूलियत मिलेगी।
बायोमेट्रिक और आधार प्रमाणीकरण से रुकेगा फर्जीवाड़ा
फर्जी पहचान पत्रों और गलत पतों का इस्तेमाल कर जीएसटी नंबर हासिल करने वाले गिरोहों को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा चक्र को कड़ा किया गया है। अब पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान आधार ओटीपी (OTP) के साथ-साथ बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Biometric Authentication) को अनिवार्य किया जा रहा है। संदिग्ध पाए जाने वाले मामलों में आवेदकों को विभाग द्वारा तय किए गए सुविधा केंद्रों पर जाकर भौतिक रूप से अपना वेरिफिकेशन कराना होगा, जिससे केवल वास्तविक व्यवसायी ही सिस्टम का हिस्सा बन सकें।
रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता
व्यापारिक संगठनों द्वारा अक्सर यह शिकायत की जाती रही है कि तकनीकी कारणों या अधिकारियों की व्यक्तिगत व्याख्या के चलते उनके जीएसटी नंबर अचानक रद्द या सस्पेंड कर दिए जाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार अब रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और कंप्यूटर आधारित बनाने जा रही है। इसके तहत किसी भी अधिकारी की व्यक्तिगत मनमानी पर रोक लगेगी और हर कार्रवाई का स्पष्ट व न्यायसंगत कारण पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
कारोबारियों के लिए क्या हैं इसके मायने?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापारिक माहौल के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगा। इससे जहां एक तरफ सरकारी प्रक्रियाओं की लालफीताशाही खत्म होगी, वहीं दूसरी तरफ केवल वास्तविक और ईमानदार कारोबारी ही बाजार में टिक पाएंगे। टैक्स चोरी रुकने से सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
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