एनटीवी टाइम चलिए खबर बेतूल से

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डंफर कांड:-
कछुए की चाल से चल रही जांच में नहीं आया कोई परिणाम,एक माह बाद भी चिचोली रेंजर की जांच अधूरी
एसडीओ ने जांच डीएफओ को सौंपी,परंतु कार्यवाही शून्य
भीमपुर महेश राठौर
भीमपुर डंपर कांड के लगभग 1 माह बीत जाने के बाद भी जांच अभी भी अनुसंधानरत हैं।डंपर कांड की जांच डीएफओ द्वारा एसडीओ पश्चिम सामान्य गौरव मिश्रा
को सौपी गई थी।जिसकी जांच कर जांच प्रतिवेदन एसडीओ द्वारा डीएफओ पश्चिम बैतूल सामान्य प्रीता एस.एम. को सौप दिया गया हैं।परंतु अब डीएफओ का कहना हैं कि जांच ऊपर के अधिकारी को दी गई हैं।मेरे स्तर से रेंजर साहब से सिर्फ स्पस्टीकरण लिया जा सकता हैं।इसके आलवा बाकी कार्यवाई ऊपर से ही होती हैं।इतनी धीमी गति से चल रही जांच में क्या कोई परिणाम सामने आएंगे।और आएंगे तो कब ये चर्चा आमजनों में चल रही हैं।क्षेत्रवासियों का कहना हैं कि आखिर चिचोली रेंजर सुरेश कुमार सोनवंशी को क्यो बचाने में लगे हैं आला अधिकारी।गौरतलब हैं की बिना कार्यवाई के छोड़ दिया रेत भरा डंपर नामक खबर 12 अक्टूबर को प्राथमिकता से प्रकाशित की गई थी।जिसमे डीएफओ पश्चिम बैतूल सामान्य ने कहा था कि इस तरह छोड़ना नियम विरुद्ध हैं।संबंधित विभाग को हैंडओवर करना चाहिए था।जिसके उपरांत लगभग 1माह बीत जाने के बाद भी कार्यवाई अभी तक शून्य हैं।
यह था मामला:-
रेंजर चिचोली सामान्य सुरेश कुमार सोनवंशी गस्ती कर नांदा से रेंज ऑफिस चिचोली लौट रहे थे।तभी भीमपुर के आदर्श पिपरिया जोड़ पर मंगलवार की रात करीब 1बजकर 24 मिनट को एक डंपर क्रमांक MP07HB2798 दिखाई दिया।रेंजर साहब ने डंपर चेक करवाया तो डंपर में रेत भरी थी।रेता भरा डंपर में रेंजर साहब ने वनरक्षक फूलदेव यादव को बिठाया और चिचोली लेकर चलने को कहा।फिर फूलदेव यादव आदर्श पिपरिया जोड़ से डंपर लेकर लगभग रात 1 बजकर 28 मिनट 45 सेकेंट को निकले।डंपर के ठीक पीछे रेंजर साहब अपने बोलेरो वाहन से लगभग रात के 1 बजकर 29 मिनट 57 सेकेंड बाद डंपर के पीछे-पीछे चिचोली की ओर गए।
लगभग 52 मिनट बाद रात 2 बजकर 20 मिनट 26 सेकेंड को लौटा डंपर
*लोगो मे चर्चा का विषय तो ये बना हुआ है कि जब रेंजर साहब ने आदर्श पिपरिया जोड़ पर लगभग रात 1 बजकर 28 मिनट 45 सेकेंड को डंपर पकड़ा।जिसमे रेत भरी थी।ऐसी कौनसी चेकिंग करनी थी जो डंपर को खैरी तक लेजाकर चेक किया गया।और लगभग 52 मिनट 26 सेकेंड बाद खैरी से आगे मोड़ पर छोड़ दिया गया।बड़ा सवाल ये उठता हैं कि आखिर चेक करने के लिए डंपर इतने दूर ले जाने की क्या आवश्यकता थी।क्या डंपर जहाँ पकड़ा था वहीं पर चेक नही हो सकता था।या कुछ और कारण था भगवान ही जाने।
रेंजर बोले रेवेन्यू का था इसलिए छोड़ दिए
**चिचोली रेंजर सुरेश कुमार सोनवंशी से जब उक्त घटना क्रम के बारे में जानकारी ली गई तो रेंजर साहब का जवाब बहुत ही चौकाने वाला था।रेंजर सुरेश कुमार सोनवंशी ने बताया कि मेरे द्वारा डंपर को चेक किया गया।फॉरेस्ट लैंड का नही था।रेवेन्यू का था।इसलिए छोड़ दिए।रेवेन्यू का था उस पर करवाई नही कर सकते थे इसलिए छोड़ दिया।जबकि नियमानुसार रेंजर साहब ने डंपर
चेक करने के बाद यदि रेवेन्यू का था तो डंपर सम्बंधित विभाग को क्यो नही सौपा।और छोड़ना ही था तो जगह पर ही क्यो नही छोड़ा।आधे रास्ते से डंपर लौटने का क्या मतलब। ऐसे बहुत से सवाल लोगो के मन मे चल रहे है।जिसका उत्तर तो स्वयं रेंजर साहब ही बता पाएंगे।
क्या रेंजर साहब ने सही किया,यदि नही,तो क्या कोई ठोस करवाई की जाएंगी
**अब देखना यह हैं कि क्या रेंजर साहब ने सही किया।यदि गलत किया तो क्या रेंजर साहब पर कोई ठोस करवाई विभाग द्वारा की जाएंगी।या ऐसे ही छोड़ दिया जाएगा।
इस विषय मे डीएफओ ने यह दिया था वर्जन:-
आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया।चैकिंग के दौरान फॉरेस्ट का नही होने पर संबंधित विभाग को हैंडओवर करना होता हैं।ऐसे नही छोड़ सकते।यदि ऐसे ही छोड़ दिये है,तो गलत हैं।
अब डीएफओ का कहना:-
*जांच ऊपर के अधिकारी को दी गई है।मेरे स्तर से रेंजर साहब से सिर्फ स्पष्टीकरण लिया जा सकता है इसके अलावा बाकी कार्यवाही ऊपर से ही होती है।
प्रीता एस.एम.
डीएफओ पश्चिम बैतुल सामान्य

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