21 अगस्त, विश्व उद्यमिता विकास दिवस पर विशेष
*विकसित भारत 2047 के लिए उद्यमिता विकास की प्रगति से ही संभव*
आज किसी भी देश का आर्थिक विकास बिना उद्यमिता के संभव नहीं है। उद्यमी को आज के समाज व देश का सच्चा व लोकप्रिय नायक कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। प्रश्न यह है कि उद्यमिता क्या है? व उद्यमी कौन है? ये अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका कैसे निभाते हैं? यह प्रश्न उद्यमिता के प्रति उत्सुकता जगाते हैं!
आज विश्व उद्यमिता दिवस पर उक्त प्रश्नों के उत्तर जानना बहुत ही आवश्यक है। उद्यमी शब्द का प्रयोग सबसे पहले फ्रांस में किया गया था। वहां 16 वीं शताब्दी में इसका प्रयोग प्रमुख सैनिक अभियानों के लिए किया गया था, व 17वीं शताब्दी में नागरिक अभियांत्रिकी के क्षेत्र के लिए, जिसमें सड़क, बंदरगाह किले आदि के निर्माणकर्ता ठेकेदारों के लिए किया गया। केवल 18 शताब्दी के प्रारंभ में ही उद्यमी शब्द का प्रयोग आर्थिक क्रियाओं के संबंध में किया गया, एवं 19वीं, 20वी और 21वीं शताब्दी के आरंभ में आर्थिक विकास की अवस्था के साथ-साथ उद्यमी शब्द का अर्थ बदलता गया।
अब यह स्पष्ट है, कि उद्यमी मात्र धन सृजन करने वाला व्यक्ति नहीं है, अपितु व्यक्तित्व विकास एवं समग्र सामाजिक आर्थिक विकास का गुरु है। जो आत्मनिर्भरता के साथ मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने, नवाचार के माध्यम से नवीन उत्पाद, नवीन तकनीक, नई डिज़ाइन के साथ अनेक जोखिमों को वहन करने एवं अनिश्चितताओं का सामना करने के साथ-साथ देश के आर्थिक विकास में भी अग्रणी बना रहता है।
इस तरह किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में उद्यमिता का योगदान बहुत ही सराहनीय होता है, क्योंकि इससे देश में नए उद्योगों, वस्तुओं, रोजगार आय व धनसंपदा का निर्माण संभव होता है। इसलिए अब समय की मांग यह है कि शासकीय नौकरियों के पीछे भागने के बजाय खुद “सीखो और कमाओ योजना” की और प्रवर्त होना पड़ेगा। इस उदारीकरण के युग में प्रत्येक व्यक्ति को किसी उद्यमी के पास रोजगार मांगने के बजाय स्वयं उद्यमी बनाकर उद्यमिता विकास में भागीदारी करना होगी। शिक्षाविदों ने कहा है कि उद्यमिता विकास देश के आर्थिक परिवर्तन का एक अच्छा, सृजनशील तथा नव प्रवर्तन की नई राह प्रशस्त करता है। इसलिए कहा जा सकता है, कि विकसित भारत 2047 उद्यमिता विकास से ही संभव होगा ।
उद्यमिता एक वृत्ति है ,जो व्यक्ति में मां के पेट से उत्पन्न नहीं होती, वरन समाज की आर्थिक,सांस्कृतिक एवं पर्यावरणजन्य स्थिति से निर्मित और विकसित होती है। इसलिए कहा गया है कि उद्यमी उत्पन्न नहीं होती, बल्कि बनाए जाते हैं। इसी कारण से देश के बेहतर औद्योगिक विकास के निर्माण में उद्यमिता अपरिहार्य है। उद्यमिता के विकास के लिए सरकार अनेक योजनाएं एवं कार्यक्रम संचालित कर रही है, साथ ही प्रेरणाये एवं सुविधाएं प्रदान करने से अनेक संस्थाओं तथा संगठनों का निर्माण भी हो रहा है। इस दृष्टि से स्वदेशी जागरण मंच ने पिछले वर्षों में इस दिवस पर 2750 उद्यमिता सम्मेलन किए थे, जिसमें करीब 5 लाख युवाओं ने हिस्सा लिया था।
मध्य प्रदेश युवा नीति 2023 के अंतर्गत 46 क्षेत्रो के 750 से अधिक पाठ्यक्रमों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए सेवा और तकनीकी कार्य क्षेत्रों में एक लाख युवाओ को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश और प्रदेश के बाहर की 10432 से अधिक कंपनियों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है।
उद्यमिता विकास में राष्ट्रीयकृत बैंकों और नियामक संस्थाओं का योगदान प्रमुख होता है। फिर भी यदि देखा जाए तो जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र वह प्रमुख संस्थान है, जो किसी भी जिले में उद्योग की स्थापना के इच्छुक व्यक्तियों के लिए सर्वाधिक प्रभावी मार्गदर्शन का कार्य करता है। वैसे तो और भी संस्थागत वित्तीय व अन्य संगठनों ने भी उद्यमिता विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
वर्ष 1991 के बाद भारत में निजीकरण का श्री गणेश होने से अब कई निजी स्वामित्व वाले उद्यम प्रारंभ होने लगे हैं। इससे जहां पहले केवल बड़े शहरों में उद्यमिता का विकास हुआ, वहीं अब ग्रामीण क्षेत्र के छोटे-छोटे गांव व कस्बे भी उद्यमिता विकास की ओर अग्रसर है। अब तो महिला उद्यमी भी उद्यमिता की और आगे बढ़ रही है। देश में सफलतम महिला उद्यमियों की सूची काफी लंबी है। इन सफल महिला उद्यमियों के कारण ही लघु उद्योगों को वर्ष 1983,1997 एवं 2004 में राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त हो सके हैं। 10 महिला उद्यमियों को विशेष उल्लेखनीय अवार्ड से भी नवाजा गया है हालांकि हमारा देश पुरुष प्रधान की अवधारणा का रहा है, किंतु अब हम 21वीं सदी में पहुंच गए हैं, जहा अब महिलाओं को उद्यमिता की समस्याओं एवं परेशानियों को दूर करके ही देश का समुचित औद्योगिक विकास संभव किया जा सकता है।
मैंने एक सर्वे किया था जिसमें स्नातक कला संकाय के छात्रों की उद्यमिता विकास में सबसे अधिक रुचि दिखाई दी, इसके बाद वाणिज्य संकाय व तीसरे नंबर पर विज्ञान संकाय के छात्रों की रुचि दिखाई दी। अब युवाओं में उद्यमी बनने का प्रस्फुटन हो चुका है एवं वे नौकरी का पीछा छोड़कर उद्यमिता विकास कार्यक्रमों की ओर अग्रसर हो रहे है।
*डॉ. बी.आर. नलवाया, पूर्व –शोध निर्देशक*
मंदसौर, मध्य प्रदेश 458001
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