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“पानी पीने योग्य नहीं”, फिर भी पीने को मजबूर: इंदौर में जलसंकट से हाहाकार

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इंदौर (संवाददाता):

“जल ही जीवन है” यह कहावत तो सबने सुनी है, लेकिन इंदौर के कई इलाकों में अब यह जीवन ही खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। भीषण गर्मी के साथ-साथ शहर में जलसंकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हालत यह है कि जिन हैंडपंपों पर साफ शब्दों में लाल रंग से “पानी पीने योग्य नहीं” लिखा है, लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए उसी पानी को भरने और पीने को मजबूर हैं।

लाल अक्षरों की चेतावनी बेमानी

शहर के कई वार्डों, विशेषकर बाहरी और झुग्गी-बस्ती वाले इलाकों में, प्रशासन ने दूषित पानी उगल रहे हैंडपंपों पर खतरे के निशान के तौर पर लाल रंग से चेतावनी लिख दी है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि इन हैंडपंपों का पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन, विडंबना देखिए कि तपती धूप में जब नल सूखे पड़े हैं और पानी के टैंकरों का कोई अता-पता नहीं है, तो जनता के पास कोई विकल्प नहीं बचा है।

स्थानीय निवासी रामकली (बदला हुआ नाम) ने बताया, “हमें पता है कि यह पानी खराब है, पीला आता है और इसमें से बदबू भी आती है। लेकिन क्या करें? बच्चे प्यासे रो रहे हैं। बिना पानी के घर का कोई काम नहीं होता। मजबूरी में इसी को छानकर और उबालकर काम चला रहे हैं।”

जल वितरण प्रणाली की विफलता

यह स्थिति नगर निगम की जल वितरण प्रणाली की विफलता को उजागर करती है। हर साल गर्मी आते ही जलसंकट के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

  • टैंकरों की कमी: प्रभावित इलाकों में पानी के टैंकर नियमित रूप से नहीं पहुँच रहे हैं। जब टैंकर आते भी हैं, तो पानी के लिए होने वाली मारामारी में कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है।
  • ट्यूबवेल सूखे: भूजल स्तर लगातार गिरने के कारण कई ट्यूबवेल और बोरिंग सूख चुके हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
  • असंतुलित वितरण: शहर के कुछ इलाकों में पानी की बर्बादी हो रही है, वहीं कई इलाके बूंद-बूंद को तरस रहे हैं।

बीमारियों का खतरा मंडराया

दूषित पानी पीने की मजबूरी ने शहर में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। डायरिया, पीलिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों के मामले सामने आने लगे हैं। विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग इस दूषित पानी के कारण सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। अगर जल्द ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो स्थिति महामारी का रूप ले सकती है।

प्रशासनिक अनदेखी पर आक्रोश

इस गंभीर जलसंकट को लेकर लोगों में प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब नजर नहीं आ रहे हैं। शिकायत करने पर केवल आश्वासन मिलते हैं, लेकिन समाधान नहीं।

इंदौर, जो अपनी स्वच्छता के लिए देश भर में जाना जाता है, वहां नागरिकों को दूषित पानी पीने पर मजबूर होना एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। प्रशासन को तुरंत जागने और इस हाहाकार को शांत करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है, इससे पहले कि कोई बड़ी त्रासदी हो जाए।

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