गुना/गुना जिले के मधुसूदनगढ़ में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां सरकारी अस्पताल की घोर लापरवाही के कारण एक युवक की जान चली गई। आकाश नाम के युवक का एक्सीडेंट हो गया था, जिसके बाद उसका भाई उसे लेकर तुरंत मधुसूदनगढ़ सरकारी अस्पताल पहुंचा। मगर, अस्पताल पहुंचने पर उन्हें पता चला कि वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। आकाश का भाई उसे अपनी गोद में लिए हुए गेट पर ही डॉक्टर-डॉक्टर चिल्लाता रहा, लेकिन इलाज के लिए कोई नहीं आया। काफी देर तक तड़पने के बाद आकाश ने अपने भाई की गोद में ही दम तोड़ दिया।
यह पहली बार नहीं है जब इस अस्पताल पर सवाल उठे हैं। कुछ दिनों पहले, आजाद सिलावट नाम के युवक की मां ने भी डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया था, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने से आजाद की मौत हो गई थी। इन घटनाओं ने एक बार फिर मधुसूदनगढ़ सरकारी अस्पताल की लचर व्यवस्था को उजागर कर दिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार आदिवासी ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने मांग की है कि पीड़ित परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए और जिम्मेदार डॉक्टर व अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि “वरना ये तंत्र सिर्फ घोषणाओं का ढोल है, जिसकी गूंज में ग़रीबों की चीखें दबा दी जाती हैं।”
जिला मंत्री रुद्रदेव सिंह ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर से बात की है। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने और 24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने पीड़ित परिवार से भी मिलकर उन्हें सांत्वना दी।
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