विशेष ब्यूरो, नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के क्षेत्र में भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। गुजरात में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (BESS) सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। यह विशाल सिस्टम ग्रिड को स्थिरता देने और सौर व पवन ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने में गेम-चेंजर साबित होगा।
क्या है इसकी ताकत? इस स्टोरेज सिस्टम की क्षमता इतनी विशाल है कि यह पूरे गोवा राज्य या मध्य प्रदेश के इंदौर जैसे बड़े और घने आबादी वाले महानगरों को लगातार 24 घंटे तक बिना किसी रुकावट के बिजली सप्लाई कर सकता है। आमतौर पर सौर ऊर्जा केवल दिन में और पवन ऊर्जा हवा चलने पर ही मिलती है, लेकिन यह प्लांट बिजली को स्टोर करके उसे पीक आवर्स (जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा हो) या रात के समय सप्लाई करने में सक्षम है।
क्लीन एनर्जी की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट भारत के ‘नेट-ज़ीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल पारंपरिक कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होगी, बल्कि ग्रिड फेल होने के खतरों से भी मुक्ति मिलेगी। गुजरात ने इस प्लांट के जरिए वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी स्टोरेज में अपनी धाक जमा दी है।
