शिमला/बेतिया (विशेष ब्यूरो):
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में स्थित ‘घेपन झील’ (Ghepan Lake) आने वाले दिनों में हिमालयी क्षेत्र से लेकर कश्मीर तक भारी तबाही मचा सकती है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की ताजा रिपोर्ट ने वैज्ञानिकों और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस रिपोर्ट में घेपन झील में ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF – ग्लेशियर फटने से आने वाली बाढ़) का गंभीर अलर्ट जारी किया गया है।
101.30 हेक्टेयर तक फैला दायरा
सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, इस खतरनाक ग्लेशियर झील का क्षेत्रफल अब बढ़कर 101.30 हेक्टेयर हो चुका है। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी और ग्लेशियर पिघलने के कारण इस झील का जलस्तर खतरनाक सीमा को पार कर रहा है। यदि यह झील फटती है, तो इसका सीधा असर न केवल हिमाचल बल्कि कश्मीर के निचले इलाकों तक देखने को मिलेगा।
रेड जोन में ‘सिस्सू’, प्रशासन अलर्ट
NRSC की इस चेतावनी के बाद लाहौल का खूबसूरत पर्यटन स्थल ‘सिस्सू’ (Sissu) और उसके आस-पास के क्षेत्रों को रेड जोन में घोषित कर दिया गया है।
झील के फटने की स्थिति में चंद्रभागा (चिनाब) नदी में अचानक भयानक बाढ़ आएगी।
पानी का यह रेला चंद घंटों में सिस्सू, तांदी और उदयपुर होते हुए जम्मू-कश्मीर के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों तक तबाही मचा सकता है।
नदी किनारे बसी सैकड़ों बस्तियां, जलविद्युत परियोजनाएं (Hydro Projects) और इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तबाह हो सकते हैं।
क्या कहती है NRSC की रिपोर्ट?
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे प्राकृतिक बांधों (Moraine) के टूटने का खतरा बढ़ गया है। घेपन झील का कमजोर ढांचा इस भारी जलप्रपात को रोकने में सक्षम नहीं दिख रहा है, जिसके कारण कभी भी ‘आउटबर्स्ट’ (विस्फोट) हो सकता है।
