मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर में आज, 700 सालों में पहली बार, शुक्रवार को नमाज अदा नहीं की गई। इसके बजाय, परिसर में केवल हिंदू समुदाय द्वारा पूजा-अर्चना की गई। इस घटनाक्रम के विरोध में मुस्लिम समाज ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया और शहर में कई दुकानें बंद रहीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसके तहत लगभग 2,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
घटना का विवरण:
धार की भोजशाला लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के बीच विवाद का विषय रही है। हिंदू इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम इसे कमाल मौला मस्जिद मानते हैं। ऐतिहासिक रूप से, यहां मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम जुमे की नमाज अदा करते हैं।
हालांकि, इस शुक्रवार को स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कड़ी निगरानी में, मुस्लिम समुदाय ने भोजशाला परिसर के भीतर नमाज अदा नहीं की। इसके विपरीत, हिंदू समुदाय के सदस्यों ने शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना की।
मुस्लिम समाज का विरोध:
इस अभूतपूर्व घटनाक्रम पर मुस्लिम समाज ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। समुदाय के सदस्यों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जताने के लिए अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधी। इसके अतिरिक्त, विरोध स्वरूप शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में अधिकांश दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जिससे शहर के सामान्य जनजीवन पर आंशिक प्रभाव पड़ा। मुस्लिम नेताओं ने प्रशासन के इस कदम पर चिंता व्यक्त की है और इसे उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर अतिक्रमण बताया है।
सुरक्षा व्यवस्था:
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए, जिला प्रशासन और पुलिस ने धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शहर के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर भोजशाला परिसर और संवेदनशील इलाकों में लगभग 2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस गश्त तेज कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
आगे की स्थिति:
इस घटना के बाद शहर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। प्रशासन दोनों समुदायों के नेताओं के साथ बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहा है। भोजशाला विवाद का यह नया मोड़ भविष्य में क्या राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव डालेगा, यह देखना बाकी है। फिलहाल, सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदमों और दोनों समुदायों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
निष्कर्ष:
धार की भोजशाला में 700 साल बाद जुमे की नमाज न होना और केवल पूजा होना एक ऐतिहासिक और संवेदनशील घटना है। इस घटना ने एक बार फिर इस पुराने विवाद को सतह पर ला दिया है। शहर में शांति बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए व्यापक सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
संवाददाता महेश राठौड़ छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं…
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