भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष: MP हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती; कहा- तथ्य सही तरीके से पेश नहीं किए

धार भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष: MP हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती; कहा- तथ्य सही तरीके से पेश नहीं किए

नई दिल्ली/धार:

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष (कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी) ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया गया था।

मुस्लिम पक्ष की आपत्तियां:

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में मुस्लिम पक्ष ने मुख्य रूप से दो आपत्तियां दर्ज कराई हैं:

  1. तथ्यों की अनदेखी: याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के समक्ष मामले के तथ्य सही तरीके से पेश नहीं किए गए और न ही उन पर पर्याप्त विचार किया गया।
  2. 1902 के आदेश का हवाला: मुस्लिम पक्ष ने 1902 में तत्कालीन धार रियासत के दीवान द्वारा जारी उस आदेश का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि इस स्थान पर केवल नमाज पढ़ी जा सकती है। उनका तर्क है कि हाईकोर्ट के फैसले में इस ऐतिहासिक तथ्य की अनदेखी की गई है।

ASI सर्वे पर रोक लगाने की मांग:

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि ASI सर्वेक्षण करता है, तो इससे विवाद और बढ़ सकता है और स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है।

क्या है धार भोजशाला विवाद?

धार का भोजशाला परिसर लंबे समय से विवादों में घिरा हुआ है। हिंदू समुदाय इसे वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है और यहां पूजा-अर्चना करने का अधिकार मांगता है। वहीं, मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौलाना मस्जिद मानता है और यहां नमाज पढ़ने का दावा करता है।

वर्तमान में, ASI की व्यवस्था के अनुसार, मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं। वसंत पंचमी के दिन अगर शुक्रवार पड़ता है, तो दोनों समुदायों के बीच अक्सर विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है।

हाईकोर्ट का फैसला:

हाल ही में, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस नामक संस्था ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए ASI को पांच सदस्यीय टीम बनाकर सर्वेक्षण करने और छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सर्वोच्च न्यायालय मुस्लिम पक्ष की याचिका पर क्या रुख अपनाता है और क्या वह ASI सर्वेक्षण पर रोक लगाता है या नहीं। इस फैसले का धार भोजशाला विवाद के भविष्य पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।

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