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Homeदेशमध्य प्रदेश के मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर: अष्टमुखी शिवलिंग का अद्भुत रहस्य

मध्य प्रदेश के मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर: अष्टमुखी शिवलिंग का अद्भुत रहस्य


शीर्षक: शिवना नदी के आंचल में बसा पशुपतिनाथ धाम: जहाँ नदी स्वयं करती है भगवान शिव का जलाभिषेक
विशेष संवाददाता
मंदसौर:
भारत में भगवान शिव के अनेक दिव्य और रहस्यमयी मंदिर हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर में शिवना नदी के तट पर स्थित श्री पशुपतिनाथ मंदिर अपने आप में अतुलनीय है। नेपाल के काठमांडू के बाद पूरे विश्व में केवल यही एक ऐसा स्थान है जहाँ भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी (आठ मुखों वाली) प्रतिमा विराजमान है।
नदी से प्रकट हुई अद्भुत प्रतिमा
इस प्राचीन धाम का इतिहास बेहद दिलचस्प है। मान्यता और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1961 में यह विशाल शिवलिंग शिवना नदी के गर्भ से बहकर बाहर आया था। इस प्रतिमा की उंचाई लगभग 7.5 फीट और वजन कई टन है।
मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, प्रतिमा में उकेरे गए आठों मुख मनुष्य के जीवन की चार अवस्थाओं—बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था को दर्शाते हैं। प्रतिमा का हर मुख अलग-अलग भाव उजागर करता है, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
शिवना नदी करती है ‘जलहरी’ का अभिषेक
इस मंदिर की सबसे बड़ी अलौकिक विशेषता यह है कि मानसून के दौरान जब शिवना नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो नदी का पानी मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचकर भगवान शिव का चरण स्पर्श करता है। स्थानीय लोग इसे ‘नदी द्वारा जलाभिषेक’ कहते हैं, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं।
धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व
इतिहासकारों का मानना है कि यह प्रतिमा गुप्तकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ लाखों भक्तों का मेला लगता है। मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने इसे एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया है, जिससे यह न केवल आस्था का, बल्कि भारत की महान सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण बना हुआ है।

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