डिंडोरी जिले के शहपुरा जनपद क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आंगनवाड़ी में पढ़ने आने वाले मासूम बच्चों का भोजन शौचालय भवन के अंदर तैयार किया जा रहा है। यह मामला ग्राम पंचायत देवगांव के पोषक ग्राम डोमदादर का है, जिसने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
Vo – जानकारी के मुताबिक आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए भोजन बनाने हेतु कोई किचन शेड उपलब्ध नहीं है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर समस्या के समाधान के बजाय वर्षों से शौचालय भवन को ही रसोई के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वच्छता और पोषण जैसी मूलभूत जरूरतों की अनदेखी करते हुए बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों और विभाग को शिकायत की गई, लेकिन अब तक न तो स्थायी व्यवस्था की गई और न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई हुई। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अधिकारियों ने कभी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने की जरूरत ही नहीं समझी, या फिर पूरे मामले को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता रहा। जब इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी विपिन डेहरिया,शहपुरा से बात की गई तो उन्होंने जांच कराने की बात कही है। हालांकि अब यह देखना अहम होगा कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या फिर बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई भी होती है।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय उदासीनता की बड़ी तस्वीर पेश कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेकर व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम उठाते हैं।
डिंडोरी से लीलाराम साहू कि रिपोर्ट



