1946 का नौसेना विद्रोह: आजादी की वो ‘अंतिम चिंगारी’ जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को घुटनों पर ला दिया

1946 का नौसेना विद्रोह: आजादी की वो ‘अंतिम चिंगारी’ जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को घुटनों पर ला दिया

गौरव जोशी

स्वतंत्रता दिवस विशेष

जब भी भारत की आजादी के महासंग्राम का जिक्र होता है, तो हमारे सामने मुख्य रूप से 1857 की क्रांति, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन या 1942 का ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ जैसे बड़े नाम आते हैं। लेकिन भारतीय इतिहास के पन्नों में एक ऐसी भी अभूतपूर्व घटना दर्ज है, जिसने महज पांच दिनों के भीतर ब्रिटिश हुकूमत के घमंड को पूरी तरह जमींदोज कर दिया था। यह गौरवशाली और निर्णायक घटना थी—फरवरी 1946 का शाही नौसेना विद्रोह (Royal Indian Navy Mutiny)।

इसे यदि स्वतंत्र भारत की ‘अंतिम और सबसे मारक चिंगारी’ कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आइए विस्तार से जानते हैं इतिहास की उस अनसुनी और रोमांचक दास्तान को, जिसने अंग्रेजों को यह साफ-साफ बता दिया था कि अब भारत पर उनका नियंत्रण असंभव है।कैसे भड़की विद्रोह की चिंगारी? (The Spark)इस ऐतिहासिक विद्रोह की शुरुआत 18 फरवरी 1946 को बॉम्बे (अब मुंबई) में ब्रिटिश नौसेना के सिग्नल्स प्रशिक्षण जहाज ‘HMIS तलवार’ से हुई थी। शुरुआती तौर पर यह एक साधारण हड़ताल जैसी दिखती थी, लेकिन इसके पीछे लंबे समय से सुलग रहा असंतोष था।

नस्लीय भेदभाव और बदतर खाना: जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों (जिन्हें ‘रेटिंग्स’ कहा जाता था) के साथ ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बेहद अपमानजनक व्यवहार किया जाता था। उन्हें गोरे नाविकों की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता था और खाने के नाम पर अत्यंत घटिया भोजन परोसा जाता था।

आजाद हिंद फौज (INA) का प्रभाव: उस समय देश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ‘आजाद हिंद फौज’ के सैनिकों पर लाल किले में मुकदमे चल रहे थे। इसने पूरी भारतीय सेना और नौसेना के भीतर राष्ट्रवाद की एक नई लहर पैदा कर दी थी। भारतीय नाविक अब गुलामी की बेड़ियों को और सहने के मूड में नहीं थे।

विद्रोह का पहला कदम: ‘HMIS तलवार’ के नाविकों ने खराब खाने का पूर्ण बहिष्कार करते हुए भूख हड़ताल कर दी। उन्होंने जहाज पर लगे ब्रिटिश हुकूमत के झंडे ‘यूनियन जैक’ को नीचे उतार दिया और उसके स्थान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, मुस्लिम लीग और कम्युनिस्ट पार्टी के झंडे एक साथ बांधकर फहरा दिए। यह इस बात का सीधा संकेत था कि यह लड़ाई किसी संप्रदाय की नहीं, बल्कि पूरे देश की साझी लड़ाई है।48 घंटे में देशव्यापी आंदोलन (The Spread)यह विद्रोह केवल एक जहाज तक सीमित नहीं रहा। देखते ही देखते इसकी गूंज पूरे देश में फैल गई और इसने एक सशस्त्र आंदोलन का रूप ले लिया:

78 युद्धपोतों पर कब्जा: अगले 48 घंटों के भीतर, बॉम्बे, कराची, कलकत्ता, विशाखापत्तनम और कोच्चि जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर मौजूद लगभग 78 युद्धपोत और 20 तटीय प्रतिष्ठान पूरी तरह से भारतीय नाविकों के नियंत्रण में आ गए। इस विद्रोह में 20,000 से अधिक नाविक सीधे शामिल हो चुके थे।

तोपों का रुख अंग्रेजों की तरफ: विद्रोही नाविकों ने जहाजों पर लगी भारी-भरकम तोपों का रुख बॉम्बे शहर की ओर कर दिया और ब्रिटिश सैन्य ठिकानों को अपनी जद में ले लिया। ब्रिटिश अधिकारी अपने ही जहाजों पर बंधक बन चुके थे।

जनता का ऐतिहासिक समर्थन: जब अंग्रेजों ने नाविकों को भोजन और रसद की आपूर्ति बंद कर दी, तो बॉम्बे की आम जनता, कपड़ा मिल मजदूर और स्थानीय नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर छोटी-छोटी नावों के जरिए जहाजों तक खाना, दूध और फल पहुंचाने लगे। पूरा बॉम्बे शहर ठप हो गया और लोग सड़कों पर उतर आए।

ब्रिटिश साम्राज्य के लिए यह सबसे बड़ा डर क्यों था?ब्रिटिश हुकूमत अच्छी तरह जानती थी कि वे भारत के करोड़ों लोगों पर केवल अपनी प्रशासनिक व्यवस्था के दम पर राज नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी असली ताकत भारतीय सैनिक और सशस्त्र बल थे, जिनकी संख्या ब्रिटिश सैनिकों से कहीं ज्यादा थी।

वफादारी का बदलना: जब तक सेना अंग्रेजों के प्रति वफादार थी, तब तक वे सुरक्षित थे। लेकिन नौसेना के इस विद्रोह ने साफ कर दिया कि अब भारतीय सैनिकों की बंदूकें ब्रिटिश क्राउन के लिए नहीं, बल्कि भारत माता की आजादी के लिए चलेंगी।

साम्राज्य का पतन तय होना: आम जनता के अहिंसक आंदोलनों को लाठियों और जेलों के दम पर दबाना अंग्रेजों के लिए फिर भी संभव था। लेकिन जब आधुनिक हथियारों और युद्धपोतों से लैस पूरी नौसेना ही बागी हो जाए, तो ब्रिटिश सरकार के पास उनसे मुकाबला करने का कोई रास्ता नहीं बचता था।

विद्रोह का समापन और इसका वास्तविक प्रभाव इस विद्रोह को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कड़े कदम उठाने की धमकी दी और एडमिरल गॉडफ्रे ने जहाजों को पूरी तरह तबाह करने की चेतावनी दी। देश में किसी बड़े रक्तपात को रोकने, व्यापक सांप्रदायिक तनाव से बचने और रणनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए राष्ट्रीय नेताओं (विशेष रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल और मोहम्मद अली जिन्ना) ने नाविकों से बातचीत की।नेताओं के इस आश्वासन पर कि आत्मसमर्पण के बाद किसी भी नाविक के साथ अन्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं की जाएगी, 23 फरवरी 1946 को नाविकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। लेकिन झुकते समय भी उनके हौसले बुलंद थे। उन्होंने अपने

अंतिम बयान में कहा था:“हम भारत के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं, ब्रिटेन के सामने नहीं।”

ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने बाद में स्वयं यह स्वीकार किया था कि भारत को जल्द से जल्द आजाद करने के पीछे बड़ा और तात्कालिक कारण भारतीय सशस्त्र सेनाओं, विशेषकर नौसेना में फैली बगावत थी, जिसने ब्रिटिश सत्ता की रीढ़ तोड़ दी थी।शाही नौसेना का यह विद्रोह हमें याद दिलाता है कि भारत की आजादी का इतिहास केवल राजनीतिक मंचों और समझौतों तक सीमित नहीं है। इसमें वर्दी पहने उन गुमनाम सैनिकों और नाविकों का भी उतना ही बड़ा योगदान है, जिन्होंने सही समय पर अपनी तोपों का रुख साम्राज्यवादी ताकतों की तरफ मोड़ दिया था। इस 15 अगस्त, आइए इतिहास के इस स्वर्णिम और निर्णायक अध्याय को अपनी वेबसाइट के माध्यम से पुनर्जीवित करें और इन वीर नाविकों को नमन करें।

जय हिंद! जय भारत!

ntvtime

Recent Posts

Tamil Nadu Govt Gold Ring Order: तमिलनाडु सरकार ने दिया 1.28 लाख सोने की अंगूठियों का ऑर्डर, जून से जन्मे बच्चों को मिलेगी

चेन्नई: तमिलनाडु की नवनिर्वाचित सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में…

9 minutes ago

बड़ा धमाका: न्यू-जेन Bajaj Pulsar 125 और Pulsar 150 इस दिन होंगी लॉन्च, मिलेंगे ये धांसू फीचर्स

बड़ा धमाका: न्यू-जेन Bajaj Pulsar 125 और Pulsar 150 इस दिन होंगी लॉन्च, मिलेंगे ये…

3 hours ago

इंदौर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: ZEEFLIX ऐप से बिना लाइसेंस कॉपीराइट कंटेंट प्रसारित करने वाला आरोपी गिरफ्तार

( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर ) इंदौर क्राइम ब्रांच की कार्रवाई; बिना लाइसेंस जियोस्टार समेत कई…

3 hours ago

Russia Ukraine War: यूक्रेन के शॉपिंग मॉल पर रूस का भीषण ड्रोन हमला, 16 की मौत, 130 घायल

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध एक बार फिर बेहद हिंसक मोड़ पर…

3 hours ago

India-Russia Defense Deal: पुतिन के दौरे पर हो सकती है महाडील, भारत को Su-57 फाइटर जेट मिलने की संभावना

भारत-रूस डिफेंस डील: पुतिन के दौरे पर लग सकती है मुहर, वायुसेना को मिलेंगे घातक…

3 hours ago