( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )
इंदौर क्राइम ब्रांच की कार्रवाई; बिना लाइसेंस जियोस्टार समेत कई ब्रॉडकास्टर्स का कंटेंट प्रसारित करने का आरोप, राजगढ़ से आरोपी प्रेमसिंह गुर्जर गिरफ्तार
एनटीवी टाइम न्यूज इंदौर/ कॉपीराइट कंटेंट को बिना अनुमति प्रसारित कर कमाई करने के मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने ZEEFLIX ऐप के जरिए कथित तौर पर बिना वैध लाइसेंस के टीवी चैनलों और अन्य कॉपीराइट कंटेंट का प्रसारण करने के आरोप में प्रेमसिंह गुर्जर को गिरफ्तार किया है।
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक आरोपी कोरोना काल के बाद से इस ऐप का संचालन कर रहा था। ऐप के जरिए जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित कई ब्रॉडकास्टर्स के कॉपीराइट कंटेंट को बिना अनुमति ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा था। पुलिस का दावा है कि इस अवैध कारोबार से हुई कमाई से आरोपी ने लग्जरी कार सहित कई महंगी वस्तुएं खरीदीं।
क्राइम ब्रांच को मामले की शिकायत जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से मिली थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने ZEEFLIX ऐप की कार्यप्रणाली की जांच शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने ऐप की सदस्यता लेकर उसकी सेवाओं का सत्यापन किया। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों को जुटाया और मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
पुलिस जांच में सामने आया कि ZEEFLIX ऐप पर एक हजार से ज्यादा टीवी चैनल उपलब्ध कराए जा रहे थे। इनमें 50 से अधिक लाइव चैनल भी शामिल थे।पुलिस के अनुसार इन चैनलों और अन्य कॉपीराइट सामग्री के प्रसारण के लिए संबंधित प्रसारकों से आवश्यक अनुमति या लाइसेंस नहीं लिया गया था।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी प्रेमसिंह गुर्जर की पहचान की। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे राजगढ़ से गिरफ्तार किया। पुलिस अब आरोपी से ऐप के संचालन, ग्राहकों, भुगतान व्यवस्था और कॉपीराइट कंटेंट के स्रोत से जुड़े सवालों पर पूछताछ कर रही है।
जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि ऐप के जरिए कथित अवैध कारोबार से हुई कमाई का इस्तेमाल आरोपी ने लग्जरी कार और अन्य महंगी वस्तुएं खरीदने में किया। अब पुलिस आरोपी की आय के स्रोत, बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कारोबार से कितनी रकम अर्जित की गई।
क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि ZEEFLIX ऐप को चलाने में आरोपी के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे। इसके लिए तकनीकी रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो पुलिस उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक किसी भी प्रसारक की कॉपीराइट सामग्री को बिना अनुमति प्रसारित करना और उसका व्यावसायिक उपयोग करना कानून का उल्लंघन है। पुलिस के अनुसार मामले में तकनीकी और वित्तीय जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद अवैध प्रसारण से जुड़े नेटवर्क और उससे होने वाली कमाई की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
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