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मदर टेरेसा की जयंती, महिला समानता दिवस और देश का पहला तैरता एटीएम: जानिए 26 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व

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मदर टेरेसा की जयंती, महिला समानता दिवस और देश का पहला तैरता एटीएम: जानिए 26 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व

नई दिल्ली: 26 अगस्त का दिन भारत और वैश्विक इतिहास में एक बेहद खास स्थान रखता है। आज ही के दिन दुनिया को मानवता और सेवा का पाठ पढ़ाने वाली मदर टेरेसा का जन्म हुआ था, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका में महिलाओं को अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार यानी वोट देने की शक्ति मिली थी। भारत के बैंकिंग इतिहास के लिए भी आज का दिन एक अनोखा रिकॉर्ड समेटे हुए है। आइए जानते हैं आज के दिन की कुछ ऐसी ही बड़ी घटनाएं जिन्होंने दुनिया की दिशा बदल दी:

  • मदर टेरेसा का जन्म (1910): दीन-दुखियों और बीमारों की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा का जन्म आज ही के दिन हुआ था। भारत को अपनी कर्मभूमि बनाने वाली मदर टेरेसा ने कोलकाता में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की थी।
  • महिला समानता दिवस और वोट का अधिकार (1920): अमेरिकी संविधान के 19वें संशोधन को आज ही के दिन आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था, जिसके बाद महिलाओं को मतदान करने का कानूनी अधिकार मिला। इसी ऐतिहासिक फैसले की याद में हर साल 26 अगस्त को दुनिया भर में ‘महिला समानता दिवस’ (Women’s Equality Day) के रूप में मनाया जाता है।
  • भारत का पहला तैरता हुआ एटीएम (2004): भारतीय बैंकिंग इतिहास में आज का दिन बेहद खास है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने केरल के कोच्चि में भारत के पहले फ्लोटिंग (तैरते हुए) एटीएम की शुरुआत आज ही के दिन की थी, जो ‘झंकार’ नाम की एक नाव (फेरी) पर लगाया गया था।
  • म्यूनिख ओलंपिक की शुरुआत (1972): जर्मनी के म्यूनिख शहर में 20वें ओलंपिक खेलों का आगाज़ आज ही के दिन हुआ था। हालांकि, बाद में यह ओलंपिक एक आतंकवादी हमले (म्यूनिख नरसंहार) के कारण खेल इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गया।
  • अलाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़गढ़ पर कब्जा (1303): भारतीय इतिहास के पन्नों को पलटें तो आज ही के दिन सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने एक लंबे घेराव के बाद राजस्थान के ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ किले पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था।
  • फ्रांस में मानवाधिकारों की घोषणा (1789): फ्रांसीसी क्रांति के दौरान आज ही के दिन वहां की राष्ट्रीय सभा ने ‘मानवाधिकारों और नागरिक अधिकारों के घोषणापत्र’ को स्वीकार किया था, जिसने आधुनिक लोकतंत्र की नींव रखी।
  • काबुल एयरपोर्ट धमाका (2021): हालिया इतिहास की बात करें तो साल 2021 में आज ही के दिन अफगानिस्तान के काबुल हवाई अड्डे पर एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 170 से अधिक अफगान नागरिक और 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।


26 अगस्त का यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे समाज ने अधिकारों की लड़ाई जीती है, कैसे तकनीक ने आम जीवन को आसान बनाया और कैसे सेवा भाव से दुनिया को बदला जा सकता है।

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