Saturday, August 15, 2026

TOP NEWS

इंदौर केंद्रीय जेल से...

(संवाददाता प्रफुल्ल तंवर)14 साल की सजा पूरी करने पर मिला 6 साल...

स्वतंत्रता दिवस के नाम...

स्वतंत्रता दिवस के नाम पर साइबर ठगों का बड़ा जाल: 'स्पेशल ऑफर' वाले...

ऐतिहासिक 15 अगस्त: लाल...

ऐतिहासिक 15 अगस्त: लाल किले की प्राचीर पर गूंजा 'वंदे मातरम', राष्ट्रीय गीत...

इंडोनेशिया में भीषण तबाही:...

इंडोनेशिया में भीषण तबाही: 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से अब तक 20...
Homeमध्य प्रदेशFreedom Struggle in Indore: इंदौर की वो 4 ऐतिहासिक जगहें, जिनकी दीवारों...

Freedom Struggle in Indore: इंदौर की वो 4 ऐतिहासिक जगहें, जिनकी दीवारों में आज भी गूंजती है आजादी की जंग

इंदौर:

देश की आजादी के संघर्ष में मालवा की इस ऐतिहासिक नगरी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ तक, इंदौर की माटी ने कई क्रांतिकारियों और सत्याग्रहियों को गढ़ा। आज भले ही इंदौर की पहचान देश के सबसे स्वच्छ शहर और औद्योगिक केंद्र के रूप में होती है, लेकिन शहर के कई ऐसे इलाके हैं, जिनकी आबो-हवा में आज भी आजादी के दीवानों के संघर्ष और देशभक्ति की खुशबू रची-बसी है।


1. रेजिडेंसी क्षेत्र: 1857 के गदर और सहादत खान के पराक्रम का गवाह
इंदौर में आजादी की पहली ज्वाला 1 जुलाई 1857 को सुलगी थी। उस दौर में ब्रिटिश रेजिडेंसी (वर्तमान रेजिडेंसी कोठी क्षेत्र) अंग्रेजों की सत्ता का सबसे बड़ा गढ़ हुआ करता था। वीर योद्धा सहादत खान, भागीरथ सिलदार और उनके साथियों ने इसी रेजिडेंसी पर अचानक तोपों से हमला बोल दिया था।
इस भीषण संघर्ष में अंग्रेजों को अपने प्राण बचाकर सिहोर की ओर भागना पड़ा था। आज का रेजिडेंसी क्षेत्र न केवल उस ऐतिहासिक जंग का प्रतीक है, बल्कि यहां स्थित स्मारक हर नागरिक को सहादत खान के उस अदम्य साहस की याद दिलाते हैं, जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी।
2. गांधी भवन और तिलक हॉल: राष्ट्रीय नेताओं का बौद्धिक और वैचारिक केंद्र
पुराने शहर के केंद्र में स्थित गांधी भवन और उससे लगा तिलक हॉल परिसर आजादी के दौर में राजनीतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र था। इस परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे शीर्ष नेताओं के आगमन और जनसभाओं के ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं।
स्वदेशी आंदोलन के दौरान इसी क्षेत्र में विदेशी कपड़ों की होली जलाई जाती थी और सत्याग्रहियों की बैठकें आयोजित होती थीं। आज भी यह क्षेत्र शहर के वैचारिक और सामाजिक आंदोलनों की रीढ़ माना जाता है।
3. मल्हारगंज और बड़ा गणपति: क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना और रणनीति केंद्र
पुराने इंदौर का मल्हारगंज और बड़ा गणपति इलाका अपनी संकरी गलियों और पारंपरिक वाड़ों के लिए जाना जाता है। 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान जब अंग्रेजों का दमनचक्र चरम पर था, तब यह क्षेत्र भूमिगत क्रांतिकारियों की सुरक्षित पनाहगाह बना।
अंग्रेजी पुलिस की पैनी नजरों से बचते हुए क्रांतिकारी इन्हीं इलाकों के गुप्त मकानों में एकत्र होते थे। यहीं से आजादी के समर्थन में पर्चे छापे जाते थे, गुप्त सूचनाओं का आदान-प्रदान होता था और पूरे मालवा अंचल में आंदोलन को दिशा देने की नीतियां तैयार की जाती थीं।
4. कृष्णपुरा छतरियां और राजवाड़ा: प्रभात फेरियों और जन-विरोध का प्रतीक
होल्कर कालीन स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण कृष्णपुरा छतरियां और ऐतिहासिक राजवाड़ा परिसर केवल सांस्कृतिक धरोहर ही नहीं हैं, बल्कि यह अंग्रेजों के खिलाफ जन-आक्रोश के प्रमुख स्थल रहे हैं।
आजादी के आंदोलन के दौरान जब भी किसी राष्ट्रीय नेता की गिरफ्तारी होती थी या ब्रिटिश सरकार कोई काला कानून लाती थी, तब इंदौर के छात्र, किसान और आम नागरिक इसी क्षेत्र में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते थे। कान्ह नदी के किनारे से निकलने वाली प्रभात फेरियां और भारत माता के जयकारों की गूंज आज भी इन ऐतिहासिक इमारतों के पत्थरों में महसूस की जा सकती है।
इतिहास के ये पन्ने इंदौर को केवल एक आधुनिक महानगर नहीं बनाते, बल्कि इसे एक ऐसी ऐतिहासिक पहचान देते हैं जिस पर हर इंदौरवासी को गर्व है। इन क्षेत्रों से गुजरते हुए आज भी उस दौर के बलिदानियों के प्रति श्रद्धा से सिर झुक जाता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments