भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने प्रदेश की महिलाओं और बेटियों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने राज्य की दो सबसे लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी योजनाओं—’मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ और ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’—को आगामी पांच वर्षों तक निरंतर जारी रखने का एक बड़ा निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार किए गए इन प्रस्तावों को आगामी कैबिनेट बैठक में औपचारिक रूप से मंजूरी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, राज्य में एक नए विशेष अभियान ‘नमन मिशन’ के गठन को भी कैबिनेट द्वारा हरी झंडी दिखाई जाएगी।
पांच वर्षों के लिए बढ़ा योजनाओं का दायरा
राज्य सरकार के इस कदम से मध्य प्रदेश की करोड़ों महिलाओं और बालिकाओं को सीधा लाभ और दीर्घकालिक सुरक्षा मिलेगी। सरकार ने पहले ही बजट में लाड़ली बहना योजना के सुचारू संचालन के लिए ₹23,882 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि का प्रावधान किया है, जिससे यह साफ है कि वित्तीय मोर्चे पर योजना को लेकर सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। कैबिनेट की मुहर लगते ही इन दोनों योजनाओं का वैधानिक विस्तार अगले 5 साल के लिए पक्का हो जाएगा
लाड़ली बहना योजना: इस योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं को हर महीने नियमित रूप से मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है। 5 साल के विस्तार से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में निरंतर मदद मिलती रहेगी।
लाड़ली लक्ष्मी योजना:
बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करने वाली इस योजना को भी जारी रखा जाएगा, जिससे बालिकाओं के सशक्तिकरण और लिंगानुपात में सुधार के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
‘नमन मिशन’ का होगा गठन
आगामी कैबिनेट बैठक के एजेंडे में एक और बेहद महत्वपूर्ण बिंदु ‘नमन मिशन’ का गठन है। मोहन सरकार इस नए मिशन के माध्यम से राज्य के विकास और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को एक नई गति देने जा रही है। माना जा रहा है कि यह मिशन राज्य के किसी विशेष सामाजिक कल्याण क्षेत्र या नागरिक सेवा सुदृढ़ीकरण से जुड़ा हो सकता है, जिसके विस्तृत दिशा-निर्देश कैबिनेट की आधिकारिक स्वीकृति के बाद साझा किए जाएंगे।
करोड़ों लाभार्थियों को मिलेगा संबल
मोहन सरकार का यह निर्णय राज्य में महिला सशक्तिकरण के संकल्प को दोहराता है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इन जनकल्याणकारी योजनाओं को पांच साल की दीर्घकालिक स्थिरता देने से लाभार्थियों में भविष्य को लेकर सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। साथ ही, धरातल पर इसके सकारात्मक सामाजिक व आर्थिक परिणाम और अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिलेंगे।


