भोपाल: रीजनल स्कूल के छात्रों ने खोला मोर्चा, बोले—’DMS को केवी में मर्ज नहीं होने देंगे’
भोपाल। राजधानी भोपाल में पहली बार एक अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला, जिसे ‘जेन अल्फा प्रोटेस्ट’ का नाम दिया जा रहा है। रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (RIE) परिसर में स्थित Demonstration Multipurpose School (DMS) के करीब 300 से 400 छात्र-छात्राएं मंगलवार को सड़कों पर उतर आए। छात्रों का विरोध इस बात को लेकर है कि उनके ऐतिहासिक स्कूल को केंद्रीय विद्यालय (KV) में मर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर किया प्रदर्शन
सड़क पर उतरे छात्रों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर जमकर नारेबाजी की। छात्रों का कहना है कि DMS की अपनी एक अलग पहचान, इतिहास और शिक्षण पद्धति है। इसे केंद्रीय विद्यालय में मर्ज करने से स्कूल का मूल स्वरूप और स्वायत्तता खत्म हो जाएगी।
छात्रों और अभिभावकों की प्रमुख मांगें
मर्जर पर तुरंत रोक: DMS को केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) के अधीन करने का प्रस्ताव रद्द किया जाए।
पहचान और स्वायत्तता बरकरार रहे: रीजनल स्कूल के रूप में संस्थान की विशिष्टता बनी रहे।
शिक्षकों व सुविधाओं का संरक्षण: वर्तमान में मिल रही शैक्षणिक सुविधाओं और शिक्षकों की व्यवस्था में कोई नकारात्मक बदलाव न हो।
क्या होता है ‘जेन अल्फा’?
साल 2010 के बाद जन्मे बच्चों को ‘जेन अल्फा’ (Generation Alpha) कहा जाता है।
यह संभवतः भोपाल का पहला ऐसा आंदोलन है, जहां इतनी कम उम्र के स्कूली छात्रों ने खुद आगे आकर अपने अधिकारों और स्कूल के अस्तित्व के लिए सड़क पर मोर्चा संभाला है
प्रशासनिक हलचल तेज
छात्रों के अचानक सड़क पर उतरने और प्रदर्शन करने से मौके पर हड़कंप मच गया। फिलहाल स्कूल प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की ओर से स्थिति को संभालने और छात्रों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, छात्र और उनके साथ मौजूद अभिभावक लिखित आश्वासन मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।


