फेस्टिव सीजन से पहले Amazon-Flipkart का बड़ा एक्शन: सेलर्स के लिए कड़े किए नियम, बढ़ा दी फीस और पेनल्टी; भड़के व्यापारी
नई दिल्ली:
देश के सबसे बड़े त्योहारी सीजन की सेल्स (Amazon Great Indian Festival और Flipkart Big Billion Days) शुरू होने से ठीक पहले, दोनों दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है [Business Standard, Upstox]। Amazon और Flipkart ने अपने प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले लाखों सेलर्स (विक्रेताओं) के लिए पेनल्टी स्ट्रक्चर, कमीशन और शिपिंग फीस को काफी सख्त कर दिया है। कंपनियों के इस कदम से सेलर्स के बीच हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
कंपनियों ने क्यों उठाए ये सख्त कदम?
- कस्टमर एक्सपीरियंस सुधारना: फेस्टिव सेल के दौरान भारी ट्रैफिक होता है। कंपनियां चाहती हैं कि कोई भी सेलर ऑर्डर मिलने के बाद स्टॉक की कमी का बहाना बनाकर उसे कैंसिल न करे।
- लेट-शिपमेंट पर लगाम: लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत रखने और लेट-शिपमेंट (देरी से सामान भेजने) की आदतों को सुधारने के लिए पेनल्टी बढ़ाई गई है।
- क्वालिटी कंट्रोल: नकली या खराब सामान की रेटिंग और शिकायतों को रोकने के लिए मॉनिटरिंग सख्त की गई है।
सेलर्स पर कैसे पड़ेगा इसका सीधा असर?
- ज्यादा जुर्माना (Penalties): यदि कोई सेलर ऑर्डर कैंसिल करता है या तय समय सीमा के भीतर कूरियर पार्टनर को पैकेट नहीं सौंपता है, तो उसे पहले के मुकाबले भारी जुर्माना देना होगा।
- रिटर्न का बढ़ा बोझ: ग्राहकों द्वारा प्रोडक्ट वापस (Return) करने पर लगने वाली शिपिंग और प्रोसेसिंग फीस का स्ट्रक्चर बदल दिया गया है। अब रिटर्न का वित्तीय नुकसान सेलर्स को ज्यादा उठाना पड़ेगा।
- कमीशन में बढ़ोतरी: कुछ चुनिंदा कैटेगरीज में कंपनियों ने अपनी क्लोजिंग और टेक्नोलॉजी फीस में भी बढ़ोतरी कर दी है।
व्यापारिक संगठनों का कड़ा विरोध: “यह छोटे व्यापारियों का शोषण है”
ई-कॉमर्स कंपनियों के इस फैसले पर देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और विभिन्न ऑनलाइन सेलर्स एसोसिएशंस ने कड़ी आपत्ति जताई है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है:
“त्योहारी सीजन साल का वह समय होता है जब छोटे और मध्यम व्यापारी (MSMEs) अपने पूरे साल की कमाई की उम्मीद लगाते हैं। ऐसे समय में अचानक फीस बढ़ाना और जुर्माने को सख्त करना छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ने जैसा है। बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां अपनी मनमानी कर रही हैं और सारा वित्तीय बोझ सेलर्स पर डाल रही हैं। सरकार को तुरंत दखल देकर इन कंपनियों की तानाशाही नीतियों और मनमाने चार्ज पर रोक लगानी चाहिए।”
ग्राहकों की जेब और बाजार पर क्या होगा असर?
बिजनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस फैसले से ग्राहकों के नजरिए से देखें तो उन्हें बेहतर सर्विस, असली प्रोडक्ट्स और तेज डिलीवरी मिलेगी। लेकिन दूसरी तरफ, छोटे विक्रेताओं के लिए बिजनेस करना मुश्किल हो जाएगा। इस अतिरिक्त खर्च और जुर्माने के डर से बचने के लिए, कई सेलर्स फेस्टिव सीजन में प्रोडक्ट्स के बेस प्राइस (दाम) थोड़े बढ़ा सकते हैं, जिससे ग्राहकों को इस बार फेस्टिव सेल में कुछ सामान महंगे मिल सकते हैं।
