अरुणाचल प्रदेश में महा-बांध का हिंसक विरोध: NHPC ऑफिस और पुलिस थाना फूंका
अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले के पासीघाट में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की ‘सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना’ के खिलाफ चल रहा आंदोलन अचानक बेहद हिंसक हो उठा है। तीन जिलों (सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग) में बुलाए गए 12 घंटे के शांतिपूर्ण बंद के समाप्त होने के बाद, शुक्रवार देर रात उग्र भीड़ ने पासीघाट इलाके में भारी उत्पात मचाया। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) के कार्यालय और एक स्थानीय पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई है।
BJP प्रदेश अध्यक्ष और दो विधायकों के आवासों पर हमला व तोड़फोड़
इस हिंसक उपद्रव के दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग, पासीघाट वेस्ट के विधायक निनोंग एरिंग और विधायक ओनी पन्यांग के निजी आवासों को सीधे निशाना बनाया। भीड़ ने सुरक्षा घेरों को तोड़ते हुए इन वीआईपी परिसरों में घुसकर भारी तोड़फोड़ की और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया। इस भीषण हमले के बाद से प्रभावित नेताओं के आवासों और पूरे पासीघाट क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।
भारी पथराव में डीएसपी सहित 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल
आगजनी और तोड़फोड़ को रोकने के लिए जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, तो भीड़ ने सुरक्षा बलों पर हिंसक पथराव शुरू कर दिया। इस पथराव में पासीघाट के डीएसपी टोनी तताक सहित 40 से अधिक पुलिसकर्मी और केंद्रीय बलों के जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थिति को अनियंत्रित होते देख सुरक्षाकर्मियों को भीड़ को खदेड़ने और काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों के भी चोटिल होने की खबर है।
स्थानीय आदिवासी समुदायों में महा-परियोजना को लेकर भारी आक्रोश
यह पूरा हिंसक विवाद NHPC द्वारा सियांग नदी पर विकसित की जा रही विशाल पनबिजली परियोजना के विरोध में उत्पन्न हुआ है। स्थानीय आदि जनजाति और विभिन्न स्वदेशी संगठनों का आरोप है कि इतने बड़े महा-बांध के निर्माण से उनकी पैतृक भूमि, कृषि क्षेत्र, पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि बांध के लिए किए जा रहे सभी तकनीकी सर्वेक्षणों (PFR) को तुरंत रोका जाए, क्षेत्र से सुरक्षा बलों को हटाया जाए और हिरासत में लिए गए स्थानीय कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए।
चीन के ‘जल युद्ध’ का मुकाबला करने के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है बांध
दूसरी ओर, केंद्र और राज्य सरकार इस बहुउद्देश्यीय परियोजना को भारत की राष्ट्रीय जल और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद रणनीतिक और अनिवार्य मानती है। चीन द्वारा तिब्बत में ऊपरी ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े बांधों के जवाब में भारत इस परियोजना को तैयार कर रहा है। सरकार का तर्क है कि सियांग बेसिन में पानी का बड़ा भंडारण तैयार करने से चीन द्वारा अचानक पानी छोड़े जाने या किसी भी संभावित ‘जल युद्ध’ के खतरे को रेगुलेट किया जा सकेगा, साथ ही असम और अरुणाचल में आने वाली विनाशकारी मौसमी बाढ़ पर भी लगाम लगाई जा सकेगी।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने की शांति की अपील और बातचीत का न्योता
घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस हिंसक वारदात की तीखी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सबको है, लेकिन सरकारी दफ्तरों, थानों और जनप्रतिनिधियों के घरों को फूंकना कानूनन अपराध है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने गतिरोध को सुलझाने के लिए आंदोलनकारी संगठनों को बातचीत की मेज पर आने का न्योता दिया है और जनता से किसी भी अफवाह में न आकर शांति बनाए रखने की अपील की है।
