‘गनिंग फॉर द गॉडमैन’ किताब में बड़ा खुलासा: गिरफ्तारी के वक्त दीवार पर सिर पटकने लगा था आसाराम, रियायत के लिए कांस्टेबल के पकड़े पैर
इंदौर/जोधपुर: नाबालिग से यौन शोषण के मामले में जोधपुर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू की गिरफ्तारी और पुलिस पूछताछ की इनसाइड स्टोरी सामने आई है। यह सनसनीखेज खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि आसाराम को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाले मुख्य पुलिस अधिकारी ने किया है। खुद को भगवान बताने वाला आसाराम पुलिस हिरासत में आते ही बुरी तरह टूट गया था और बचने के लिए कई हथकंडे अपनाए थे।
किस किताब में है यह पूरा विवरण और किसने लिखी है?
इस पूरे घटनाक्रम का प्रामाणिक और विस्तृत विवरण ‘गनिंग फॉर द गॉडमैन: द ट्रू स्टोरी बिहाइंड आसाराम बापूज़ कनविक्शन’ नामक चर्चित किताब में दर्ज है। इस पुस्तक के मुख्य लेखक अजय पाल लांबा हैं, जो भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं। इस किताब को लिखने में संजीव माथुर ने सह-लेखक की भूमिका निभाई है और इसे हॉर्पर कॉलिंस इंडिया ने प्रकाशित किया है। घटना के समय अजय पाल लांबा जोधपुर वेस्ट के पुलिस उपायुक्त (DCP) थे और उन्होंने ही आसाराम को पकड़ने वाली विशेष पुलिस टीम का नेतृत्व किया था।
सोफे से जमीन पर उतारा तो निकल आए थे आंसू
किताब के अनुसार, साल 2013 में जब राजस्थान पुलिस की विशेष ‘टॉप-20’ टीम आसाराम को गिरफ्तार करने इंदौर स्थित उसके आश्रम पहुंची, तो वह शुरुआत में बेहद रसूख और शान से सोफे पर बैठा हुआ था। पुलिस टीम में शामिल एक सब-इंस्पेक्टर ने जब सख्त तेवर दिखाते हुए उसे सोफे से उतारकर जमीन पर बैठने को कहा, तो उसका सारा अहंकार ढह गया और उसकी आँखों में आँसू आ गए।
पूछताछ कक्ष का हाई-वोल्टेज ड्रामा
अजय पाल लांबा ने अपनी किताब में लिखा है कि पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसा, तो आसाराम ने रियायत पाने के लिए मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की। पुलिस की कड़ी पूछताछ से बचने और खुद को असहाय दिखाने के लिए उसने गुस्से और हताशा में आकर कमरे की दीवार पर अपना माथा (सिर) पटकना शुरू कर दिया। जब उसे लगा कि उसका रसूख काम नहीं आ रहा है, तो वह पूछताछ कक्ष में मौजूद पुलिस अफसरों से लेकर वहां तैनात कांस्टेबल तक के पैरों में गिर गया और छोड़ने की भीख मांगने लगा। पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए वह रोते-रोते अचानक बीच में ही जोर-जोर से गाना गाने लगता था।
“गलती हो गई मैंने…”
किताब में यह स्पष्ट दर्ज है कि जब तत्कालीन डीसीपी अजय पाल लांबा ने कड़े लहजे में पूछा कि बाबा ये सब कैसे किया, जल्दी बताएं, तब फूट-फूटकर रोते हुए आसाराम ने आखिरकार घुटने टेक दिए और कहा कि गलती कर दी मैंने।
शुरुआत में पुलिस टीम को ऊपर से आदेश आ जाएगा जैसी धमकियां देने वाले इस स्वयंभू संत का सच पुलिस की मुस्तैदी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के बल पर अदालत के सामने आया, जिसके बाद उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
