Home बिजनेस बेंगलुरु CEO का बड़ा ऐलान: उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश...

बेंगलुरु CEO का बड़ा ऐलान: उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुरुषों को नौकरी पर रखने से किया इनकार, सोशल मीडिया पर छिड़ा विवाद

0

बेंगलुरु (23 सितंबर 2026): सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विवादित पोस्ट के बाद इंटरनेट पर ‘क्षेत्रीय भेदभाव’ और ‘वर्कप्लेस सेफ्टी’ को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है. बेंगलुरु स्थित कंपनी ‘A1 Sports World’ (जो बच्चों के लिए स्पोर्ट्स प्रोग्राम चलाती है) के फाउंडर और सीईओ कार्तिक एसजी (कार्तिक शैनॉय) ने यह घोषणा की है कि उनकी कंपनी अब उत्तर भारत के चार राज्यों से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी पर नहीं रखेगी.

सीईओ कार्तिक एसजी ने X पर अपनी पोस्ट में लिखा:

“मुझे इसके लिए खेद है… लेकिन आज एक लंबी बहस और आंतरिक विवाद के बाद हमने यह पूरी तरह साफ कर दिया है… हम अपनी कंपनी में इन 4 राज्यों (उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश) से आने वाले किसी भी पुरुष उम्मीदवार को नौकरी पर नहीं रखेंगे।”

सीईओ के इस फैसले की पूरी रिपोर्ट

बैन लगाने के पीछे सीईओ का तर्क

कार्तिक एसजी ने इस सामूहिक प्रतिबंध के पीछे सुरक्षा चिंताओं और एक हालिया घटना का हवाला दिया:

  • पूर्व कर्मचारी का दुर्व्यवहार: सीईओ के मुताबिक, करीब दो महीने पहले एक साफ-सुथरे बैकग्राउंड और अच्छे रिज्यूमे वाले व्यक्ति को काम पर रखा गया था। लेकिन करीब दो हफ्ते पहले उस कर्मचारी को महिला सहकर्मियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार, प्रताड़ना और जबरदस्ती करने के आरोपों के बाद नौकरी से निकाल दिया गया।
  • बच्चों की सुरक्षा का हवाला: कार्तिक ने अपनी सफाई में कहा कि उनकी कंपनी छोटे बच्चों के साथ काम करती है, इसलिए महिला कर्मचारियों और बच्चों की सुरक्षा उनके लिए बिजनेस चलाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
  • बैकग्राउंड वेरिफिकेशन पर सवाल: उन्होंने दलील दी कि ऐसा हिंसक या खराब व्यवहार किसी के रिज्यूमे पर नहीं दिखता और कई बार पुलिस बैकग्राउंड चेक भी इसे पकड़ने में नाकाम रहते हैं।

⚠️ इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

इस पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़क गया है और प्रतिक्रियाएं दो धड़ों में बंट गई हैं:

  • भेदभावपूर्ण नीति का विरोध (बहुमत): अधिकांश यूजर्स और एचआर (HR) विशेषज्ञों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। लोगों का कहना है कि किसी एक व्यक्ति की गलती के लिए चार राज्यों (जिनकी कुल आबादी लगभग 40-50 करोड़ है) के सभी पुरुषों को सामूहिक रूप से दोषी मान लेना पूरी तरह अनुचित, भेदभावपूर्ण और गैर-कानूनी है। यूजर्स का तर्क है कि उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनके व्यक्तिगत आचरण और योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि उनके जन्मस्थान या राज्य के आधार पर।
  • सुरक्षा के नाम पर समर्थन (अल्पमत): कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने महिला सुरक्षा और बच्चों के प्रति कंपनी की सख्ती का समर्थन किया है, हालांकि वे भी पूरे क्षेत्र को प्रतिबंधित करने के तरीके से पूरी तरह सहमत नहीं दिखे।

📊 कंपनी का वर्तमान वर्कफोर्स (सीईओ का दावा)

विवाद बढ़ने पर कार्तिक ने अपने वर्कफोर्स का डेटा साझा करते हुए बताया कि उनकी कंपनी में वर्तमान में 32 कर्मचारी हैं, जिनमें से 14 महिलाएं हैं। कुल कर्मचारियों में से 20 लोग अन्य राज्यों से हैं, जिनमें 12 दक्षिण भारत से बाहर के हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी कंपनी में पहले से राजस्थान की एक महिला कर्मचारी काम कर रही हैं, जिन्होंने कंपनी के इस नए फैसले का पूरा समर्थन किया है।

यह मामला इस समय नेशनल मीडिया और कॉर्पोरेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लोग इस तरह की हायरिंग पॉलिसी पर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version