बुरहानपुर पुलिस पर कस्टडी में प्रताड़ना का आरोप, पीड़ित जिला अस्पताल में भर्ती; थाना प्रभारी ने आरोपों को नकारा
बुरहानपुर:
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से खाकी को कटघरे में खड़ा करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां खंडवा के दो युवकों ने निम्बोला थाना पुलिस पर हवालात में बेरहमी से मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ितों का कहना है कि सड़क दुर्घटना के बाद जब उन्होंने पुलिस से सहायता मांगी, तो पुलिस उन्हें ही थाने ले गई और रातभर हौज पाइप से पीटा। फिलहाल, चोटिल युवकों का इलाज खंडवा के जिला अस्पताल में चल रहा है। वहीं, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए युवकों पर ही नशे में हंगामा करने की बात कही है।
सहायता की जगह मिली प्रताड़ना: पीड़ित
अस्पताल में उपचाराधीन रणजीत जांगिड़ ने बताया कि वह अपने साथी सज्जन सिंह नागर के साथ 1 सितंबर को बस की एनओसी (NOC) के काम से बुरहानपुर आए थे। देर रात खंडवा लौटते समय निम्बोला इलाके में विपरीत दिशा से आ रहे एक वाहन ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी। मौके पर जब विवाद बढ़ा, तो उन्होंने मदद के लिए डायल-112 को फोन किया। पीड़ितों का आरोप है कि घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने उनकी शिकायत सुनने के बजाय उन्हें ही जबरन गाड़ी में बैठाया और थाने ले आई। थाने में टीआई राहुल कामले और अन्य स्टाफ ने उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया और रातभर पानी वाले मोटे पाइप से उनकी पिटाई की। सुबह होने पर पुलिस ने शांति भंग (धारा 151) का मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। जेल से छूटने के बाद दोनों सीधे अस्पताल पहुंचे।
पुलिस का पक्ष: युवकों ने की थी अभद्रता
इस पूरे मामले में निम्बोला थाना प्रभारी राहुल कामले का कहना है कि पुलिस पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे हैं। पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना के वक्त दोनों युवक अत्यधिक शराब के नशे में थे और मौके पर मौजूद लोगों के साथ-साथ डायल-112 के कर्मचारियों से भी अभद्रता कर रहे थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उन्हें थाने लाया गया था और नियमानुसार धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी। पुलिस कस्टडी में किसी भी तरह की मारपीट नहीं की गई है।
