राहुल सेन
NTV Time एक्सक्लूसिव: 80 साल का इंतजार खत्म! आजादी के बाद पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ा धार, PM मोदी ने दिखाई मेमू ट्रेन को हरी झंडी
धार/वडोदरा, 8 सितंबर: मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। आजादी के बाद से लेकर अब तक, यानी लगभग 8 दशकों से रेल की राह देख रहे धार जिले के लोगों का सपना आज आखिरकार पूरा हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम से वर्चुअली रिमोट का बटन दबाकर प्रतापनगर (वडोदरा) और धार जिले के नवनिर्मित ‘टांडा रोड’ रेलवे स्टेशन के बीच पहली मेमू (MEMU) पैसेंजर ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना का बड़ा मील का पत्थर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर छोटा उदयपुर-धार रेलवे परियोजना के तहत नवनिर्मित जोबट-टांडा रोड रेलखंड को राष्ट्र को समर्पित किया। इसी नए ट्रैक के चालू होने से धार जिले का टांडा रोड स्टेशन सीधे भारतीय रेलवे के मुख्य ब्रॉडगेज नेटवर्क से जुड़ गया है। अब तक धार और अलीराजपुर के सुदूर आदिवासी अंचलों के लोगों के लिए वडोदरा या इंदौर जाना एक बेहद कठिन और लंबा सफर होता था, लेकिन अब यह दूरी सिमट गई है।
व्यापार, रोजगार और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस रेल रूट के शुरू होने से मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच न सिर्फ कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि इस पूरे पिछड़े और आदिवासी क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर भी बदल जाएगी:
- सीधा और सस्ता सफर: धार, जोबट, और अलीराजपुर जैसे क्षेत्रों के छात्र, मरीज और व्यापारी अब बेहद कम खर्च में सीधे वडोदरा और गुजरात के अन्य बड़े शहरों तक पहुंच सकेंगे।
- व्यापार को बढ़ावा: स्थानीय कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प और आदिवासियों के पारंपरिक सामानों को सीधे बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
- रोजगार के नए अवसर: नए रेलवे स्टेशन और ट्रेनों के संचालन से स्थानीय स्तर पर छोटे-बड़े रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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टांडा रोड रेलवे स्टेशन पर दीपावली जैसा जश्न
इधर प्रधानमंत्री मोदी ने वडोदरा से हरी झंडी दिखाई, और उधर जैसे ही फूलों और गुब्बारों से सजी-धजी मेमू ट्रेन धार के टांडा रोड स्टेशन पर पहुंची, पूरा इलाका भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा। रेलवे स्टेशन पर हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने पहुंचे थे। पारंपरिक आदिवासी लोक नृत्य, ढोल-ताशों की थाप और आतिशबाजी के साथ ट्रेन का स्वागत किया गया। कई बुजुर्ग भावुक हो गए, जिनका कहना था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि वे अपने जिले में ट्रेन देख पाएंगे।
यह शुरुआत धार जिले के विकास में एक नए युग की शुरुआत है, जो आने वाले समय में इस पूरे अंचल की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली साबित होगी।
