धार (मध्य प्रदेश): राकेश शितोले
ये तस्वीरें मध्य प्रदेश के तथाकथित डिजिटल और विकसित भारत के मुंह पर एक करारा तमाचा हैं। जब आप इन तस्वीरों को देखेंगे, तो आपको तय करना मुश्किल हो जाएगा कि हमारे बच्चों का भविष्य संवर रहा है या दुर्गंध मार रहा है। धार जिले के कुक्षी विधानसभा क्षेत्र के टाणा (चिपराटा) गांव से एक ऐसी कड़वी हकीकत सामने आई है, जिसने पूरे सूबे के प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ हिला दी है।
यहाँ के सरकारी प्राथमिक स्कूल के 22 मासूम बच्चों की क्लास किसी आलीशान स्कूल भवन में नहीं, बल्कि एक सरकारी शौचालय (टॉयलेट) के भीतर लग रही है।
क्या है पूरा मामला? (तथ्य जो आपको हैरान कर देंगे)
- 2 साल से बेघर बचपन: स्कूल का पुराना सरकारी भवन पिछले दो साल से इतना जर्जर है कि उसकी छत कभी भी गिर सकती है. प्रशासन ने उसे ढहा तो दिया, लेकिन नया कमरा बनाना भूल गया.
- भिलटदेव मंदिर से टॉयलेट तक का सफर: पहले बच्चों को एक मंदिर के महज 8×8 फीट के छोटे से बरामदे में ठूस-ठूस कर बिठाया जाता था। लेकिन जब धूप और बारिश ने परेशान किया, तो नए बने (और बिना इस्तेमाल किए गए) बालिका शौचालय को ही क्लासरूम और शिक्षक का दफ्तर बना दिया गया।
- कमोड के बगल में कतार: सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि मासूम बच्चे टॉयलेट की दीवारों और कमोड के बीच जमीन पर कतार बनाकर बैठे हैं और हाथों में ककहरे की किताबें थामे हुए हैं।
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वायरल वीडियो के बाद ‘कागजी’ दौड़
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया के जरिए आला हुक्मरानों के मोबाइल स्क्रीन तक पहुंचा, शिक्षा विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया। बदनामी के डर से बीईओ हीरालाल निगवाल और बीआरसी विजय शुक्ला तुरंत अधिकारियों की फौज लेकर गांव पहुंचे। आनन-फानन में बच्चों को शौचालय से निकालकर गांव के ही एक निजी/अस्थाई मकान में शिफ्ट किया गया।
“साहब का बहाना और जनता का सवाल”
प्रशासनिक अधिकारियों का रटा-रटाया तर्क है कि नए स्कूल भवन का निर्माण कार्य जारी है और जल्द ही बच्चों को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है:
“अगर नया कमरा स्वीकृत हुए एक साल से ज्यादा का समय हो चुका था, तो जिम्मेदार अफसर कुंभकर्णी नींद क्यों सो रहे थे? क्या अधिकारियों के अपने बच्चे एक दिन भी ऐसे शौचालय में बैठकर ककहरा सीख सकते हैं?”
यह घटना केवल एक जर्जर इमारत की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन 22 मासूमों के आत्मसम्मान और उनके सपनों के साथ किया गया एक भद्दा मजाक है।
