नई दिल्ली: देश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद के बीच भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने एक बड़ा आदेश जारी किया है. आयोग ने मध्य प्रदेश (MP), उत्तर प्रदेश (UP), उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर समेत देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (SSR) कराने का फैसला लिया है. चुनाव आयोग द्वारा संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता (कट-ऑफ) तिथि माना जाएगा.
क्या है पूरा मामला और क्यों हुआ विवाद?
पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी घमासान मचा हुआ है. इस प्रक्रिया के तहत देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए थे. विपक्ष ने इस बड़े पैमाने पर हुई नाम कटौतियों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए थे. हालांकि, चुनाव आयोग ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि ये नाम ‘ASDD’ यानी अनुपस्थित (Absent), स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shifted Permanently), मृत (Dead) और डुप्लीकेट (Duplicate) श्रेणियों के तहत नियमों के मुताबिक ही सूची से बाहर किए गए हैं.
इस नए आदेश के मुख्य बिंदु और बड़े बदलाव
चुनाव आयोग ने इस नए संशोधन आदेश के साथ ही मतदाताओं के लिए आवेदन और सुधार से जुड़े नियमों को भी काफी आसान कर दिया है.
- पात्रता तिथि (Qualifying Date): इस पूरी प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि तय की गई है, जिससे नए और युवा वोटर आसानी से सूची से जुड़ सकेंगे.
- नए नाम जोड़ना (Form 6): ऑनलाइन पोर्टल से अतिरिक्त डिक्लेरेशन (घोषणा पत्र) की अनिवार्य शर्त को हटा दिया गया है, जिससे नए पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद आसान होगी.
- नाम हटाने पर कड़े नियम (Form 7): नए नियमों के तहत अब एक मतदाता अधिकतम 10 ‘फॉर्म-7’ ही जमा कर सकेगा. इसके साथ ही नाम हटाने से पहले निर्वाचन अधिकारियों को गहन जांच करनी होगी और संबंधित मतदाता को अपनी बात रखने का पूरा मौका देना अनिवार्य होगा.
- भौतिक उपस्थिति से राहत: वोटर लिस्ट में सुधार या सुनवाई की प्रक्रिया को सरल किया गया है, जिससे मतदाताओं को बार-बार निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे.
इस नए आदेश के बाद इन 17 राज्यों में वोटर लिस्ट को पूरी तरह से दुरुस्त किया जाएगा, जिसमें छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम दोबारा जोड़ने और त्रुटियों को सुधारने का काम प्राथमिकता पर किया जाएगा. जिन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां चुनाव से ठीक पहले इस कवायद को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
