अमेरिकी मीडिया हाउस फॉक्स न्यूज (Fox News) की एक नई और चौंकाने वाली डिजिटल खोजी रिपोर्ट में फ्रांस में जारी भीषण दंगों और भारत में हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बीच एक गहरा अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन होने का दावा किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, एक सीक्रेट और संगठित वैश्विक नेटवर्क इन दोनों लोकतांत्रिक देशों में असंतोष की आग को हवा दे रहा है। वरिष्ठ पत्रकार असरा नोमानी द्वारा की गई इस जांच रिपोर्ट का शीर्षक “ग्लोबल कैओस इंक ग्रोस टू 101 ग्रुप्स” रखा गया है, जिसमें दुनिया भर में फैले एक सुनियोजित इकोसिस्टम का पर्दाफाश किया गया है।
क्या है पूरा मामला और सीक्रेट नेटवर्क का दायरा?
इस खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, यह सीक्रेट नेटवर्क दुनिया के 9 देशों में फैला हुआ है, जिसमें कुल 101 सक्रिय संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। इसे ‘रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम’ नाम दिया गया है, जिसमें मुख्य रूप से वामपंथी (कम्युनिस्ट) गुट शामिल हैं। इस पूरे इकोसिस्टम में 33 छात्र व युवा संगठन सक्रिय हैं, जिनके साथ कई ट्रेड यूनियन और डिजिटल मीडिया आउटलेट्स भी जुड़े हुए हैं।
इस नेटवर्क का काम करने का तरीका बेहद शातिर है। ये संगठन किसी भी देश के स्थानीय और आंतरिक मुद्दों (जैसे स्कूलों की स्थिति, बेरोजगारी या राजनीतिक नियुक्तियां) को सोशल मीडिया पर अत्यधिक हवा देते हैं और देखते ही देखते उन्हें एक बड़े हिंसक आंदोलन में बदल देते हैं।
चीन में बैठा ‘सिंघम’ कर रहा है मास्टरमाइंडिंग और फंडिंग
रिपोर्ट का सबसे बड़ा दावा यह है कि चीन (शंघाई) में बैठा अमेरिकी मूल का टेक निवेशक नेविल रॉय सिंघम इस पूरे कम्युनिस्ट नेटवर्क को वित्तीय सहायता और दिशा-निर्देश दे रहा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, नेविल रॉय सिंघम शंघाई में बैठकर ‘ब्रेकथ्रू न्यूज’, ‘कोडपिंक’ और ‘पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन’ जैसे कई प्रो-कम्युनिस्ट संगठनों को करोड़ों डॉलर की फंडिंग ट्रांसफर कर चुका है। यह नेटवर्क स्थानीय प्रदर्शनकारियों को लॉजिस्टिक्स, सोशल मीडिया एम्प्लीफिकेशन और टूलकिट प्रदान करता है ताकि लोकतांत्रिक सरकारों को अस्थिर किया जा सके।
भारत और फ्रांस का आपसी कनेक्शन कैसे जुड़ा?
रिपोर्ट में विशेष रूप से ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ (IAP) नामक फ्रांस-आधारित संगठन का जिक्र किया गया है। दावा है कि यह संगठन पेरिस में हो रही हिंसा और भारत में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच डिजिटल संदेशों और रणनीतियों को साझा करने (Cross-Border Messaging) का मुख्य जरिया बना हुआ है।
इसके अलावा, वैश्विक मंच ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ (PI) ने भी अपनी एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन और भारत में हो रहे इन प्रदर्शनों को एक साथ जोड़कर इन्हें ‘नई क्रांतियों’ का रूप देने की बात स्वीकारी थी। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद वैश्विक एजेंसियों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि कैसे किसी देश के घरेलू मुद्दों का इस्तेमाल विदेशी ताकतें अपने राजनीतिक और सामरिक फायदों के लिए कर रही हैं।
