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टेक जगत में हड़कंप: माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब गूगल भी कॉस्ट कटिंग की राह पर, 5 देशों में कर्मचारियों को दिया ‘पैसे लेकर नौकरी छोड़ने’ का ऑफर

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टेक जगत में हड़कंप: माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब गूगल भी कॉस्ट कटिंग की राह पर, 5 देशों में कर्मचारियों को दिया ‘पैसे लेकर नौकरी छोड़ने’ का ऑफर

सिलिकॉन वैली/नई दिल्ली: टेक इंडस्ट्री से एक बार फिर चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) द्वारा हाल ही में की गई कॉस्ट कटिंग के बाद, अब गूगल (Google) ने भी खर्चों में कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने दुनिया के 5 प्रमुख देशों में अपने कर्मचारियों को एक खास वॉलंटरी सेपरेशन प्रोग्राम (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के तहत पैसे लेकर नौकरी छोड़ने का ऑफर (Pay-to-Quit Offer) दिया है।

AI पर भारी खर्च से बिगड़ा बजट

टेक जगत के विश्लेषकों के अनुसार, इस बड़े कदम के पीछे की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाला अंधाधुंध खर्च है। दरअसल, गूगल इस समय जेनरेटिव एआई (जैसे Google Gemini) और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर (डेटा सेंटर्स और एआई चिप्स) के विकास पर पानी की तरह पैसा बहा रहा है। एआई टेक्नोलॉजी की इस रेस में बने रहने के लिए किए जा रहे भारी निवेश के कारण कंपनी का तिमाही बजट और वित्तीय संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है, जिसकी भरपाई के लिए अब मानव संसाधनों और परिचालन खर्चों में कटौती की जा रही है।

क्या है गूगल का ‘पैसे लेकर नौकरी छोड़ने’ का ऑफर?

गूगल ने सीधे तौर पर ले-ऑफ (कंपलसरी छंटनी) करने के बजाय एक उदार और स्वैच्छिक रास्ता चुना है। इसके तहत:

  • वॉलंटरी पैकेज: 5 चुनिंदा देशों के कर्मचारियों को कंपनी की ओर से एक आकर्षक सेवरेंस पैकेज ( severance package) ऑफर किया जा रहा है, जिसमें कुछ महीनों की एडवांस सैलरी और अन्य वित्तीय लाभ शामिल हैं।
  • लक्ष्य: इस कदम का उद्देश्य बिना किसी कानूनी या कूटनीतिक विवाद के स्वेच्छा से कर्मचारियों की संख्या (Headcount) को कम करना है, जिससे कंपनी के परिचालन घाटे को नियंत्रित किया जा सके।

लगातार बदल रहा है टेक कंपनियों का फोकस

यह वैश्विक संकट केवल गूगल तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ समय में अमेज़न (Amazon), ओरेकल (Oracle) और माइक्रोसॉफ्ट जैसी शीर्ष टेक कंपनियों ने भी अपने पारंपरिक विभागों से बजट और स्टाफ कम किया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि टेक कंपनियां अब अपने पारंपरिक बिजनेस मॉडल से ध्यान हटाकर पूरी तरह से एआई-फर्स्ट (AI-First) बनने की दिशा में काम कर रही हैं। इसके कारण आने वाले दिनों में गैर-एआई विभागों में काम करने वाले टेक प्रोफेशनल्स के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।


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