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गुरुग्राम में आधी रात से ब्लैकआउट: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, 7 घंटे में आईं 5500 शिकायतें

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गुरुग्राम में आधी रात से ब्लैकआउट: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, 7 घंटे में आईं 5500 शिकायतें

गुरुग्राम:
साइबर सिटी गुरुग्राम और उसके आस-पास के इलाकों में बिजली संकट ने विकराल रूप ले लिया है। बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा निजीकरण के विरोध में शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण पूरा शहर आधी रात से ब्लैकआउट की चपेट में है। बिजली गुल होने से न केवल दर्जनों सोसायटियां और रिहायशी इलाके अंधेरे में डूब गए हैं, बल्कि सुबह होते-होते पानी की सप्लाई भी पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।

हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के कंट्रोल रूम में महज 7 घंटे के भीतर उपभोक्ताओं की तरफ से 5,500 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

इन इलाकों में सबसे बुरा हाल, सड़कों पर उतरे लोग

शहर के घनी आबादी वाले और प्रमुख क्षेत्रों से बिजली कटौती की सबसे अधिक शिकायतें सामने आ रही हैं। इनमें मुख्य रूप से अशोक विहार फेज-2 व 3, सेक्टर-2, सेक्टर-4, सेक्टर-5, सेक्टर-23, पालम विहार सब-डिवीजन, भीमगढ़ खेड़ी, दयानंद कॉलोनी, राजेंद्र पार्क, रतन विहार, विष्णु गार्डन और सेक्टर-105 शामिल हैं। इन इलाकों में रात 12 बजे से लगातार बिजली गायब है।

बिजली आपूर्ति बहाल न होने से नाराज भीमगढ़ खेड़ी और दौलताबाद के ग्रामीणों का गुस्सा शुक्रवार सुबह सड़क पर फूट पड़ा। गुस्साए लोगों ने दौलताबाद फ्लाईओवर पर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके चलते फ्लाईओवर पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लंबा ट्रैफिक जाम देखा गया, जिसके बाद पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

पानी की किल्लत से हाहाकार, ठप हुआ उद्योगों का चक्का

लगातार 12 से 16 घंटे से अधिक समय तक बिजली न आने के कारण रिहायशी सोसायटियों के इनवर्टर और जनरेटर बैकअप भी जवाब दे गए हैं। सबसे बड़ा संकट पेयजल का खड़ा हो गया है क्योंकि बिजली आधारित बूस्टिंग स्टेशन और घरेलू मोटर बंद पड़े हैं। लोग सुबह से पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।

इस हड़ताल का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गुरुग्राम के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों जैसे उद्योग विहार, कादीपुर, बसई, दौलताबाद और सेक्टर-37 के क्लस्टर्स में भी उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि बिजली न होने से फैक्ट्रियों में मशीनें बंद पड़ी हैं, जिससे व्यापार जगत को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है।

आखिर क्यों हड़ताल पर हैं बिजली कर्मचारी?

यह पूरा संकट हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के एक हालिया फैसले के बाद खड़ा हुआ है। आयोग द्वारा गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए ‘इलेवन पावर’ नामक एक निजी कंपनी को 25 साल का समानांतर डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिए जाने का बिजली कर्मचारी कड़ा विरोध कर रहे हैं।

कर्मचारियों और इंजीनियरों का आरोप है कि सरकार बिजली क्षेत्र का निजीकरण कर रही है, जिससे उनके रोजगार और सरकारी बुनियादी ढांचे को बड़ा खतरा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल आपातकालीन सेवाओं (जैसे अस्पतालों) को छोड़कर अन्य किसी भी फॉल्ट या मरम्मत कार्य के लिए ड्यूटी पर नहीं लौटेंगे। दूसरी तरफ, प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में उतारा है और वैकल्पिक हेल्पलाइंस जारी की हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत मिलती नहीं दिख रही है।


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