गौरव जोशी
H-1B वीजा धारकों को बड़ा झटका: ट्रंप प्रशासन का नया प्रस्ताव—नौकरी जाते ही तुरंत छोड़ना होगा अमेरिका
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और अन्य विदेशी कर्मचारियों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर आ रही है। ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B वीजा नियमों में बड़े बदलावों की तैयारी कर ली है, जिससे लाखों कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
इस नए घटनाक्रम से जुड़ी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
1. 60-दिन का ग्रेस पीरियड (Grace Period) खत्म करने की तैयारी
सबसे बड़ा और हैरान करने वाला प्रस्ताव 10 सितंबर 2026 को पेश किया गया है। अमेरिकी सरकार H-1B वीजा धारकों को मिलने वाले 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को पूरी तरह खत्म करने पर विचार कर रही है।
- असर: मौजूदा नियम के मुताबिक, अगर किसी H-1B कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो उसे अमेरिका में रहने और नई नौकरी या नया स्पॉन्सर ढूंढने के लिए 60 दिन का समय मिलता है।
- नया नियम: अगर यह नया प्रस्ताव पास हो जाता है, तो नौकरी छूटते ही कर्मचारी का कानूनी स्टेटस तुरंत खत्म हो जाएगा और उसे बिना किसी मोहलत के तुरंत अमेरिका छोड़ना होगा। इस प्रस्ताव पर अभी 60 दिनों तक जनता से सुझाव और आपत्तियां (Public Comments) मांगी गई हैं।
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2. H-1B वीजा फीस में भारी बढ़ोतरी लागू
अमेरिकी सरकार ने 9 सितंबर 2026 से नए फीस नियम को प्रभावी कर दिया है।
- इसके तहत जिन कंपनियों में 50 से अधिक कर्मचारी हैं और उनके 50% से ज्यादा कर्मचारी H-1B या L-1 वीजा पर काम कर रहे हैं, उन्हें अब $4,000 (लगभग ₹3.3 लाख) की अतिरिक्त फीस देनी होगी।
- यह नियम न केवल नए वीजा आवेदनों पर, बल्कि वीजा एक्सटेंशन (Extension) कराने पर भी लागू होगा, जिससे कंपनियों के लिए भारतीय प्रोफेशनल्स को रखना और महंगा हो जाएगा।
3. वीजा धोखाधड़ी और सैलरी चोरी पर बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी प्रशासन ने उन कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है जो नियमों का दुरुपयोग कर रही हैं:
- Cognizant पर लगा बैन: अमेरिकी श्रम विभाग (Labor Department) ने वीजा धोखाधड़ी और कर्मचारियों को तय सीमा से कम वेतन (Wage Suppression) देने के आरोपों के चलते आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) के नए ग्रीन कार्ड (PERM) आवेदनों पर फ्रीज (रोक) लगा दी है।
- सैलरी लेवल पर नकेल: USCIS उन कंपनियों के H-1B आवेदनों को तेजी से रद्द (Revoke) कर रहा है, जो कर्मचारियों से एडवांस लेवल का काम लेती हैं लेकिन कम टैक्स और खर्च के चक्कर में उन्हें कागजों पर ‘लोअर-वेज लेवल’ (कम सैलरी कैटेगरी) में दिखाती हैं।
4. H-4 (Spouses) वर्क परमिट पर भी मंडराया खतरा
इसके अलावा, H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी (Spouses) को अमेरिका में काम करने की अनुमति देने वाले H-4 EAD (Employment Authorization Document) को भी खत्म करने का प्रस्ताव दोबारा समीक्षा के दायरे में आ गया है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो आश्रितों के लिए अमेरिका में नौकरी करना नामुमकिन हो जाएगा।
इन बदलावों से साफ है कि अमेरिका अब विदेशी वर्क वीजा को लेकर अपनी नीतियों को बेहद सख्त कर रहा है, जिसका सीधा और सबसे बड़ा असर भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों (Tech Professionals) पर पड़ने वाला है।
