इंदौर:गांधी जयंती के अवसर पर आज इंदौर के रीगल चौराहे पर एक बेहद अनोखा और झकझोर देने वाला विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। यहाँ की बेटियों और छात्राओं ने देश और राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और घटती आजादी को लेकर समाज और प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। रीगल तिराहे पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के ठीक सामने आयोजित इस प्रदर्शन को छात्राओं ने ‘न्यायाग्रह’ का नाम दिया है।
काले कपड़े और हाथों में जंजीरें: प्रतीकात्मक विरोध
आमतौर पर त्योहारों और खास मौकों पर सजने-संवरने वाली बेटियां आज रीगल चौराहे पर काले कपड़े पहने और अपने दोनों हाथों में लोहे की जंजीरें (बेड़ियां) बांधकर पहुंचीं। छात्राओं का कहना है कि हाथों में बंधी ये जंजीरें उस सामाजिक और प्रशासनिक सोच का प्रतीक हैं, जो महिलाओं को सुरक्षा देने के बजाय उनकी स्वतंत्रता पर ताले लगा रही है।
“सुरक्षा के नाम पर आजादी क्यों छीनी जा रही?”
प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के नाम पर लड़कियों को ही घरों में कैद करने की कोशिश की जाती है।
छात्राओं ने मुख्य रूप से इन रूढ़िवादी बंदिशों पर ऐतराज जताया:
- “6 बजे के बाद बाहर मत निकलो”: सुरक्षा के नाम पर लड़कियों को समय सीमा में बांधना।
- “ऐसे कपड़े मत पहनो”: महिलाओं के रहन-सहन और पहनावे को अपराध की वजह बताना।
- पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर पाबंदी: दिल्ली जैसे मामलों का हवाला देकर लड़कियों की आवाजाही को प्रतिबंधित करना।
“मध्य प्रदेश में न हो दिल्ली जैसे हालात”
छात्राओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि दिल्ली में हुए गंभीर अपराधों के बाद प्रशासन द्वारा लड़कियों को रोकना या सार्वजनिक पार्कों को बंद कर देना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार और स्थानीय प्रशासन महिलाओं को अपनी पसंद से और पूर्ण स्वतंत्रता के साथ जीने का अधिकार प्रदान करे। प्रशासन का काम लड़कियों को डराकर घर में बैठाना नहीं, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और भयमुक्त माहौल देना है ताकि मध्य प्रदेश में दिल्ली जैसी स्थिति दोबारा कभी पैदा न हो।
गांधी प्रतिमा के साये में बिना किसी हुड़दंग के, बेहद शांत लेकिन आक्रामक ढंग से किए गए इस ‘न्यायाग्रह’ ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
