नई दिल्ली/श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष में एक बार फिर इतिहास रचते हुए भारत को रक्षा और सुरक्षा के मामले में महाशक्ति बना दिया है। इसरो ने आज तड़के अपने सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली GSLV रॉकेट के जरिए देश के बेहद एडवांस्ड इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।
इस सैटेलाइट को पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (भू-समकालिक कक्षा) में स्थापित किया गया है। इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह सैटेलाइट बिना पलक झपकाए चीन और पाकिस्तान की हर हरकत पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखेगा।
- दुश्मन की हर हरकत पर 24 घंटे नजर: अब तक के ज्यादातर सैटेलाइट्स पृथ्वी का चक्कर लगाते थे और एक निश्चित समय पर ही किसी खास जगह की फोटो ले पाते थे। लेकिन यह नया सैटेलाइट भारत के ऊपर आसमान में एक ही जगह स्थिर रहेगा। इससे चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर होने वाली किसी भी संदेहास्पद गतिविधि, सैनिकों की हलचल या बंकर निर्माण की ‘नियर रियल-टाइम’ (तुरंत) तस्वीरें भारतीय सेना को मिलती रहेंगी।
- आपदा प्रबंधन में ‘संजीवनी’ बनेगा यह सैटेलाइट: सीमाओं की सुरक्षा के अलावा, देश में आने वाली किसी भी प्राकृतिक आपदा जैसे—भीषण बाढ़, चक्रवात (Cyclone), बादल फटना या जंगलों की आग की स्थिति में यह सैटेलाइट गेम-चेंजर साबित होगा। इसकी मदद से आपदा प्रबंधन टीमें समय रहते सटीक रेस्क्यू ऑपरेशन प्लान कर सकेंगी।
- अत्याधुनिक कैमरों से लैस: लगभग 2,268 किलोग्राम से अधिक वजनी इस सैटेलाइट में मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे घने बादलों और धुंध के बीच से भी साफ तस्वीरें खींचने में सक्षम हैं।
- इसरो का बड़ा पावर शो: इस सफल लॉन्चिंग के साथ ही इसरो ने दुनिया को एक बार फिर अपनी ताकत का अहसास कराया है। GSLV रॉकेट की इस सफलता ने भारी सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने की भारत की आत्मनिर्भरता को और मजबूत कर दिया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध केवल जमीन पर नहीं बल्कि अंतरिक्ष के डेटा से जीते जाते हैं। इस सैटेलाइट के चालू होने के बाद भारत को अपनी खुफिया जानकारी के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसे भारत का ‘आई इन द स्काई’ (आसमान में भारत की आंख) कहा जा रहा है, जो हिंद महासागर से लेकर हिमालय की चोटियों तक भारत के सुरक्षा कवच को अभेद्य बनाएगा।
