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इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पर लगा प्रतिबंध: नियम तोड़ने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, कक्षाओं में विदेशी छात्रों का कोटा भी हुआ तय

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इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पर लगा प्रतिबंध: नियम तोड़ने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, कक्षाओं में विदेशी छात्रों का कोटा भी हुआ तय

रोम / नई दिल्ली:
यूरोपीय देश इटली से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। इटली की मेलोनी सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक एकीकरण को मजबूत करने के लिए सख्त कानूनी कदम उठाए हैं। सरकार द्वारा पारित नए अध्यादेश के तहत अब इटली के किसी भी स्कूल परिसर के भीतर चेहरा ढकने वाले धार्मिक परिधानों, जैसे बुर्का और नकाब को पहनने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही देश के स्कूलों में भाषाई और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए विदेशी मूल के छात्र-छात्राओं की संख्या पर 30% की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है।

बुर्का-नकाब पहनने पर पाबंदी और 1 लाख रुपये का जुर्माना

सरकार की ओर से जारी नए आदेश के मुताबिक, क्लासरूम के माहौल में पारदर्शिता बनाए रखने और सुरक्षा कारणों से छात्रों का चेहरा साफ दिखना अनिवार्य होगा। यदि कोई भी छात्र इस नए नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है या स्कूल के भीतर सामाजिक और शैक्षणिक रूप से तालमेल बिठाने में गंभीर रूप से सहयोग नहीं करता, तो प्रशासन सख्त रुख अपनाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित छात्र के माता-पिता या अभिभावकों पर 1,000 यूरो (लगभग 1 लाख रुपये) तक का भारी मौद्रिक जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि यह प्रतिबंध केवल पूरे चेहरे को ढकने वाले बुर्का और नकाब पर लागू होगा, जबकि सिर ढकने वाले पारंपरिक स्कार्फ (हिजाब) पर यह रोक नहीं होगी।

क्लासरूम में विदेशी छात्रों की संख्या होगी सीमित

इस अध्यादेश का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा अप्रवासी और विदेशी छात्रों से जुड़ा है। सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र से यह अनिवार्य कर दिया है कि किसी भी स्कूल की एक सिंगल क्लास में इतालवी भाषा न जानने वाले या विदेशी नागरिकता वाले छात्रों की संख्या 30% से अधिक नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि जिन कक्षाओं में इतालवी भाषा न समझने वाले बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा होती है, वहां बच्चों का सही एकीकरण नहीं हो पाता। यह नियम इसलिए लाया गया है ताकि विदेशी बच्चे स्थानीय भाषा और संस्कृति को मुख्यधारा में शामिल होकर तेजी से सीख सकें।

अभिभावकों के लिए मुफ्त इतालवी भाषा कक्षाएं होंगी अनिवार्य

नए कानून के तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए भी नियम कड़े किए गए हैं जिनके बच्चे स्कूल सिस्टम में घुलने-मिलने में गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ऐसे बच्चों के पेरेंट्स के लिए सरकार द्वारा आयोजित मुफ्त इतालवी भाषा की कक्षाओं में शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई पेरेंट्स इन नियमों और भाषा क्लास का पालन करने में विफल रहते हैं, तो उन पर भी कानूनी कार्रवाई और दंड लगाया जाएगा।

फैसले को लेकर बंटी राय

प्रधानमंत्री मेलोनी ने इन ऐतिहासिक उपायों को एक समझदारी भरा कदम बताया है और कहा है कि ये नियम समाज को बांटने के लिए नहीं बल्कि प्रवासियों को असल मायने में देश की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बनाए गए हैं। सरकार के समर्थकों और दक्षिणपंथी विचारकों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बेहतरीन कदम बताया है। वहीं, दूसरी तरफ कुछ मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला देकर इस फैसले का विरोध भी शुरू कर दिया गया है।

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